रमेसर के बइला ह मर गे। वाेहा चिन्ता म परगे। वोकर घरवाली ह किहिस तय चिन्ता मत कर थोकुन पइसा म हा जाेर के रखे हंव जेमा बइला बिसा लाव। रमेसर ह बइला बिसाय बजार गईस। भइसा बेचवइया मन लंग भाव पूछिस एक झिन बइला बेचवइया ह हाथ म मुंदरी पहिने रिहिस तेन ह अपन मुंदरी वाला अंगठी ल हला हला के बइला मन के भाव बताय लागिस। दूसरिहा बइला बेेचवइया ह कान म लुरकी पहिने रहय तेन ह कान ल हला हला के भाव बताइस। तीसर बइला बेचवइया ह दांत म सोन ठोकये रिहिस तेन ह दांत चमका के भाव बताये लागिस। रमेसर ह मन म किहिस इमन मोला सोन देखा देखा के बिजरावत हे। मुहंू सोन पहिरूहू अउ बइला बिसाय ल छोड़ के सब पइसा के मुंदरी, लुरकी अउ दांत म सोन ठोकवा डारिस। बइला के बिना खेत खार ठप होगे। रमेसर अउ वोकर घरवाली आन मन के बनिहारी करे लागिन एक धनी कई दिन ले भूती नई चलिस रमेसर के घर म दू दीन ले आगी नई बरे रिहिस। रमेसर के घरवाली ह किहिस ‘जरय वो सोन जेमा नाक चिथा जाय’ जा तोर सब सोन ल बेच के चाउर दार ले आ। आज सोन के जघा म बइला रहिते तब अइसना नौबत नई आतिस। रमेसर ह मुड़ ल नवाय सोन ल बेच सोनार घर लकर-धकर रेंग दिस।
ध्रुव सिंह ठाकुर बिलासपुर
कहिनी