पांच पंचायतों के 1929 अनपढ़ों को डिजिटल साक्षर बनाया जाएगा। इसके लिए जिला साक्षरता विभाग ने जांजगीर जिले के 1929 अनपढ़ों का सर्वे कर चयन किया है। इस हफ्ते ही इन्हें डिजिटल साक्षर करने के लिए काम शुरू किया जाएगा। पहले साक्षर करने के लिए उन्हें पढ़ाया जाएगा और साक्षर होने के बाद उन्हें कंप्यूटर ज्ञान दिया जाएगा।
कुछ समय पूर्व तक चलने वाली साक्षरता अभियान योजना बंद हो चुकी है और वह नए बदलाव के साथ जल्द ही फिर से शुरू होगी लेकिन साक्षरता विभाग इसके पहले खुद ही पहल कर जांजगीर जिले की पांच पंचायतों के 1929 अनपढ़ों को डिजिटल साक्षरता अभियान से जोड़ने जा रहा है। जिला साक्षरता विभाग ने विभाग के ही कर्मचारियों को जांजगीर जिले की जयरामनगर, पुड़ू, मोहतरा, मोहदा और किसान परसदा के 1929 लोगों का चयन किया है। चयनित लोगाें में सभी वर्ग के ऐसे अनपढ़ लोग शामिल हैं जिनमें साक्षर होने की ललक है और वे कंप्यूटर भी सीखना चाहते हैं। इसके लिए विभाग के परियाेजना समन्वयक रघुवीर सिंह राठौर ने बताया कि हमने अपनी टीम गांवों में भेजकर यह पता लगाया कि वाकई में क्या लोग साक्षर होने के साथ कंप्यूटर भी सीखना चाहते हैं। इनमें पुरुष और महिलाओं के साथ गांवों के बुजुर्ग भी शामिल हैं। अभी विभाग इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चला रहा है लेकिन इसके सफल होने के बाद डिजिटल साक्षर करने वालों का दायरा बढ़ाया जाएगा। इसे रूरल अर्बन मिशन योजना का नाम दिया गया है।
ये कैसी भरपाई
जिले की औसत आनावारी 45 पैसा से कम निकली कुल 542 गांव सूखे से प्रभावित रहे
सुनील शर्मा | बिलासपुर
बीते खरीफ सीजन में जिले के 267 गांवों में आनावारी 37 पैसा रही। यानी सरकार ने माना कि यहां पूरी तरह सूखे का असर रहा। इस सरकारी सूखे को भी बीमा कंपनी ने दरकिनार कर दिया। इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने सरकार के साथ करार करने के बाद धान की फसल का बीमा किया। पर कंपनी ने बेलतरा, गढ़वट, मदनपुर, सलखा सहित 217 गांवों के ही किसानों को क्लेम दिया है। उसमें भी कई को 92 पैसे या दो या तीन रुपए भी दे दिए। कंपनी ने उतने गांवों को भी क्लेम नहीं दिया गया, जितने में सरकार खुद सूखा मान रही है।
सिंचित खेत में 750 रुपए तो असिंचित में 650 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से बीमा कंपनी को किसानों ने प्रीमियम की रकम चुकाई लेकिन क्लेम की रकम तय करने में ही कंपनी ने 6 माह लगा दिए। राज्य सरकार ने 47 करोड़ रुपए मुआवजा बांट दिया क्योंकि 542 गांवों में सूखे का असर साफ तौर पर दिखाई दिया। आनावारी रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई। जिले में औसत 45 पैसा आनावारी निकली जिनमें 267 गांवों में आनावारी 37 पैसे से कम निकली। 0-37 पैसे आनावारी यानी पूरे पंचायत में सूखा। वहीं 275 गांवों में 0.38 पैसे से 0.50 पैसे के बीच रही। बिलासपुर जिले के 84,803 किसान सूखे से प्रभावित हुए और 60,908 हेक्टेयर में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचा। कंपनी ने आनावारी और फसल कटाई प्रयोग के आधार पर क्लेम के निर्धारण का दावा किया लेकिन जब क्लेम फाइनल हुआ और किसानों के बैंक खातों में रुपए पहुंचे तो वे हैरान हो गए। किसी को 92 पैसा तो किसी को दो रुपए तो किसी को तीन रुपए क्लेम मिला। बता दें कि 10 हजार 799 किसानों को कुल 9 करोड़ 34 लाख रुपए क्लेम दिया गया है। लेकिन कम मुआवजा मिलने से किसानों में नाराजगी है। उप संचालक कृषि आरजी अहिरवार के मुताबिक अब तक उनके पास किसानों की शिकायत नहीं आई है, लेकिन शिकायत मिली तो नियमानुसार कार्यवाही करेंगे।
267 गांवों में सर्वाधिक सूखा, 217 गांव के किसानों को बांटा गया क्लेम
84,803 किसानों के 60,908 हेक्टेयर में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचा
किसान कह रहे-इस बार अकाल पड़ा तो खाली हो जाएंगे गांव
जिन गांवों में इस बार इतना अकाल पड़ा कि किसान खरीदी केंद्रों में धान नहीं बेच पाए, वहां के किसानों पर भी बीमा कंपनी को तरस नहीं आया। उन्हें कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। फसल बीमा कराने वाले किसान अब पछता रहे हैं। चिल्हाटी, हरदी, कुकुर्दीकेरा, जैतपुरी, सेमराडीह,पतईडीह, मनवा और रहटाटोर के किसान सहकारी समिति चिल्हाटी में दो बार प्रदर्शन कर चुके हैं। पहले उन्होंने समिति का घेराव किया और शनिवार को बीमा कंपनी इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस के वाल पेंट पर गोबर पोत दिया। किसानों ने गोबर से कंपनी के नाम को मिटा दिया। कहा कि जो कंपनी बुरे वक्त में साथ नहीं दे रही है, उसका नाम गांव में नहीं रहने देंगे। मस्तूरी के चिल्हाटी समिति के अंतर्गत आने वाले 8 गांवों में 1007 किसान रजिस्टर्ड है। 766 ऋणी किसानों ने प्रति एकड़ 400 रुपए देकर बीमा कराया। अऋणी किसानों ने भी बीमा कराया। क्लेम नहीं मिलने से किसानों में भारी आक्रोश है। धुनऊ राम ने कहा कि बीज के लायक भी धान नहीं हुआ। सहकारी समिति से धान के बीज मिलना मुश्किल है। बृजलाल यादव, मांगेश्वर, जीतराम, रामचंद्र, कौशल कंवर के साथ ही अन्य किसानों ने कहा कि इस बार सूखा पड़ा तो उनके पास गांव छोड़कर जाना होगा। उन्होंने कहा कि 50 फीसदी तो अभी से गांव से पलायन कर चुके हैं। कुछ किसानों ने आत्महत्या करने की बात भी कही।

साक्षर होने के बाद उन्हें कंप्यूटर ज्ञान दिया जाएगा।
जैतपुरी, हरदी सहित कई गांव के किसानों में क्लेम नहीं मिलने से आक्रोश।
ब्लॉक वाइज साक्षरता प्रतिशत
ब्लॉक मेल फिमेल कुल
बिल्हा 38 67 73
मस्तूरी 90.14 73.65 70.25
कोटा 68.24 47.85 69.61
तखतपुर 78 64 82.5
गौरला 92.9 79.55 -
पेंड्रा 80.52 69.1 84.55
मरवाही 90.77 69.61 -
चुनौती है प्रोजेक्ट पूरा करना
विभाग के सामने प्रोजेक्ट पूरा करने की कई तरह की चुनौती है। विभाग के पास अभी कंप्यूटर की कमी है लेकिन अफसर इसके लिए निश्चिंत हैं। उनका कहना है कि विभाग में कुछ कंप्यूटर हैं और कुछ शासन से मंगाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कंप्यूटर की कमी आड़े नहीं आएगी।
बेरोजगारों को दी जाएगी संगीत की शिक्षा भी
विभाग ने इसके साथ ही बेराेजगारों को संगीत की शिक्षा भी देने की योजना बनाई है। बेरोजगारों को गिटार, हारमोनियम, तबला, इलेक्ट्रिक आर्गन आदि सिखाया जाएगा जिससे वे इसके जरिए कार्यक्रम पेश कर अपने लिए रोजगार भी पैदा कर सकें।
बिल्हा में सबसे ज्यादा 73 प्रतिशत लोग अनपढ़
इसी हफ्ते डिजिटल साक्षरता का काम शुरू किया जाएगा