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मनुष्य को आशावान और मन साफ होना चाहिए

3 वर्ष पहले
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गुजराती जैन भवन टिकरापारा में प्रवचन देते मुनि श्री पंथक महाराज।

सिटी रिपोर्टर | बिलासपुर

बुरी आदतों को कुव्यसन कहते हैं। ऐसे व्यसन की बुरी आदतें आती तो आसानी से हैं, पर जाती नहीं हैं। यह आदत जब तक रहती है हैरान करती है। लेकिन कोई पक्का मनोबल वाला व्यक्ति चाहे तो इन बातों से छुटकारा पा सकता है। ऐसा मनोबल पाने के लिए धर्म ध्यान, भक्ति और उपवास करने की जरूरत है। व्यसन छोड़ने हमेशा मनुष्य को निराशा छोड़कर आशावान होना पड़ेगा। जब इरादा अच्छा हो, मन साफ हो तो व्यसन का सेवन बंद हो ही जाता है। उक्त बातें पंथक महाराज ने प्रवचन के दौरान कही। गुजराती जैन भवन टिकरापारा में मुनि श्री पंथक महाराज का प्रवचन चल रहा है। उन्होंने कहा कि व्यसन बंद होने के बाद धर्म, ध्यान और एकाग्रता लाकर शरीर को याेग के माध्यम से फिर से ताकत और गठीला बनाया जा सकता है। इसलिए बुरी आदतों का ऐसा विकराल स्वरूप देख करके अपने अंदर डालने की कोशिश ही मत करो।

ये रहे उपस्थित

जैन समाज के अमरेश जैन ने बताया कि मुनि श्री के सुबह की गोचरी गांधी परिवार और दोपहर को आहारचर्या रमा जेठालाल तेजाणी परिवार को लाभ मिला। इस अवसर पर अध्यक्ष भगवान दास सुतारिया, गोपाल वेलाणी, कीर्ति गांधी, दिलीप तेजाणी, दीपक गांधी, राजू तेजाणी, सुधा गांधी, वत्सला कोठारी, वंदना तेजाणी, वंशिका तेजाणी, भावना गांधी, भरत दामाणी, दीपक सुतारिया, मनीष शाह, योगेंद्र तेजाणी, हेमा तेजाणी, ज्योत्सना जैन, आशा दोषी, हीर कपाड़िया, भावना सेठ सहित समाज के अन्य लोग उपस्थित थे ।

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