सिंदूर, चावल, हल्दी से की वट की पूजा परिक्रमा लगाकर मांगी पति की दीर्घायु
सुबह से शाम तक शहर के वट वृक्ष के पास पूजा करती रहीं महिलाएं। पति की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए मांगा आशीर्वाद।
सिटी रिपोर्टर | बिलासपुर
पति की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए मंगलवार को महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखा। इस दौरान सुहागिनों ने बरगद के वृक्ष की पूजा कर 108, 54, 21,11 फेरे लगाए और कलावा बांधा। सुबह से शाम तक वट वृक्ष के पास महिलाएं पूजा करती हुई दिखाई दीं। इस ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत और शनि जयंती का संयोग रहा। इस कारण शहर के शनि और हनुमान मंदिरों में भीड़ रही। चिल्हाटी व राजकिशोर नगर के शनि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर थाली में पूजा की सामग्री लेकर वट वृक्ष के नीचे पहुंची। यहां सिंदूर, हल्दी, चावल से बरगद की पूजा की। इसके बाद वट वृक्ष के फेरे लेकर कलावा बांधा और पति की दीर्घायु की कामना की। सदर बाजार स्थित व्यंकटेश मंदिर में गमले में रखे वट वृक्ष की महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। सुहागिनों ने गमले में रखे पौधे की सिंदूर, चावल, हल्दी आदि से पूजा कर फेरे लिए और मत्था टेककर पति की दीर्घायु की प्रार्थना की। सुहागिनों ने वट की पूजा-अर्चना करने के बाद सत्यवान और सावित्री की कथा सुनी।
महिलाओं ने गीत गाते हुए वृक्ष के परिक्रमा लगाए
सीपत| सुहागिनों ने सोलह श्रृंगार कर अखंड सौभाग्य व पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर महिलाओं ने वट वृक्ष की विधि विधान से पूजा की। वट अपने आप में दीर्घायु व चिरायु वृक्ष है। इसमें समस्त देवों का निवास भी माना जाता है। महिलाओं ने सुहाग की सामग्री अर्पित कर गीत गाते हुए वृक्ष की 108 परिक्रमा की। मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखा था और वरदान हासिल कर अपने पति को जीवित कर लिया था।