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जोन के अफसरों ने जयपुर से सीखी पानी बचाने की तकनीक

3 वर्ष पहले
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रेलवे अंडरब्रिज में जमा होने बारिश के पानी को जमीन के अंदर ही स्टोर करने की कवायद रेलवे प्रशासन ने शुरू कर दी है। इस तकनीक को जयपुर रेलवे ने सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब बिलासपुर में इस तकनीक की शुरुआत की जाएगी। नए बनने वाले अंडरब्रिज में इसका प्रावधान किया जाएगा। देशभर में रेलवे का अंडरब्रिज बारिश के दिनों में आम जनता की परेशानी का सबब बन जाता है। कई-कई दिन तक अंडरब्रिज में पानी भरे रहने की वजह से बंद रहते हैं। इस समस्या से निबटने के लिए देश भर में रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग के अफसर कवायद में जुटे हुए थे। अलग-अलग जोन के अफसरों ने इस पर काम किया। कुछ जगह पर अंडरब्रिज में संपवेल बनाकर उसमें पंप लगाया गया है। उसके जरिए अंडरब्रिज के अंदर जमा होने वाले पानी को बाहर फेंका जाता है। लेकिन इसमें भी समस्या आने लगी। बारिश के साथ कीचड़ संपवेल में भर गया और मशीन ने चलना बंद कर दिया। यह सिस्टम भी फेल हो गया। जयपुर रेलवे अंडरब्रिज में भरने वाले पानी को भू-गर्भ में भेजने का सिस्टम तैयार किया। यह रेन वाटर हार्वेस्टिंग है। जमा होने वाले पानी को अंडरब्रिज से कुछ दूर टैंक तक ले जाकर उसे जमीन के अंदर भेजा जा रहा है। इस सिस्टम को समझने के लिए पिछले दिनों बिलासपुर जोन के इंजीनियरिंग विभाग के अफसर जयपुर गए थे। जयपुर में उन्होंने इस तकनीक का बारीकी से अध्ययन किया है। उस सिस्टम को यहां अपनाने के लिए अब वे जोन के वरिष्ठ अफसरों के सामने प्रेजेंटेशन देंगे। जयपुर में वाटर हार्वेस्टिंग के फायदे और नुकसान सभी पर चर्चा की गई। बिलासपुर में तारबाहर, लालखदान फाटक से आगे बने अंडरब्रिज में पानी भरता है। हाल ही में चकरभाठा में अंडरब्रिज बनकर तैयार हुआ है। इस बारिश में पता चलेगा कि वहां कितना पानी भरता है। भिलाई पावर हाउस और भिलाई नेहरू नगर अंडरब्रिज में हर साल बारिश का पानी जमा होता है।

अंडरब्रिज में पानी भरने की समस्या हल करने अब वाटर हार्वेस्टिंग अपनाएंगे

तारबाहर अंडरब्रिज में बारिश के दिनों में आती है पानी भरने की समस्या।

डिजाइन में होगा बदलाव

अंडरब्रिज में भरने वाले पानी को किस तरह से भू-गर्भ में भेजा जाएगा इसे इंजीनियरिंग विभाग के अफसर मैप व स्कैच के जरिए अफसरों को समझाएंगे। अभी अफसर इसे समझकर आएं और उसके मुताबिक स्कैच बनाने की तैयारी कर रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्र में पानी का भराव क्षमता भी अलग है। इसलिए डिजाइन करते समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि कहां पर किस तरह से डिजाइन किया जाना है। क्षेत्र की मिट्टियां भी अलग है। मिट्टी के हिसाब से भी प्लानिंग होगी।

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