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पानी का महत्व समझें और नदी को बचाएं: डॉ. यादव

3 वर्ष पहले
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बिलासा कला मंच और अरपा बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। मंच द्वारा अरपा बचाओ यात्रा निकाली गई। रविवार को अरपा बचाओ को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहे बिलासा कला मंच के संस्थापक और अरपा बचाओ अभियान के संयोजक डॉ. सोमनाथ यादव ने कहा कि इस अभियान की मुख्य विशेषता है, लोगों को नदी, तालाब, खेत, पेड़ के संरक्षण के प्रति जागरूक करना। लोग इन सबका महत्व समझें और इसका बचाव करें। वह गत 10 वर्षों से अरपा के उद्गम से संगम तक की तीन दिवसीय यात्रा कर जनता को इसकी महत्ता को बता रहे हैं।

राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास नदी से हुआ है। वहीं तालाबों का निर्माण मानव ने ही किया है। तालाब हमारी संस्कृति है, तो नदी सभ्यता। गांवों का नाम भी तालाबों के ऊपर रखा गया है, जैसे रानीसागर, लाखासर, बालसमुंद, तालाब पारा आदि। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में तालाब का महत्वपूर्ण स्थान है, इसे बचाना हम सबकी जवाबदारी है। विशिष्ट अतिथि मां महामाया मन्दिर ट्रस्ट के सचिव सुनील सोंथलिया ने कहा कि रतनपुर वासियों को तालाबोंं के विकास, सौंदर्यीकरण, गहरीकरण, जलभराव आदि के लिए एक समिति बनाकर काम करना चाहिए। इसके लिए महामाया ट्रस्ट पूरी तरह से समिति का सहयोग करेगी। वक्ता संजय जायसवाल ने कहा कि वर्तमान में रतनपुर में 158 तालाब हैं। रजबंधा तालाब में सबसे ज्यादा पानी है, लेकिन सारे नाले के गंदे पानी वहीं छोड़े जाते हैं। तालाब पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है। बसंत यादव ने कहा कि तालाबों को पुनर्जीवित करने की सबको जिम्मेदारी लेनी होगी। आज तालाबों में अतिक्रमण हो गए हैं, तालाब किसानों के मित्र हैं। बालकृष्ण मिश्र ने कहा कि 57 एकड़ का भीखा तालाब मर गया है। सौंदर्यीकरण के नाम पर सीमेंटीकरण तालाब को खत्म कर रहा है। अजय शर्मा ने कहा कि तालाब का संरक्षण प्राचीन पद्धति से होना चाहिए। पहले हर व्यक्ति तालाब की सफाई करता था, पर आज ऐसा दिखाई नहीं देता। संगोष्ठी में माणिकलाल सोनी, प्राण चड्ढा, नीरज जायसवाल, शिव बघेल, शंकरलाल पटेल, सूरज सोनी ने भी विचार रखे।

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