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शासकीय कर्मियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ें, बने नियम: डॉ. पाठक

3 वर्ष पहले
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सरकारी कर्मचारी को अपने बच्चों को सरकारी शालाओं मे दाखिले के लिए बाध्यकारी नियम बनाया जाना चाहिए, तभी सरकारी अधिकारी को शालाओं की दशा सुधारने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। अभी सभी अधिकारियों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में अध्ययन करते है, उसमें दुर्दशा से उनको कोई सरोकार नहीं है। उक्त बातें सरकारी शालाओं के प्रभावीकरण को लेकर हुई संगोष्ठी के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक ने कही।

उन्नत शिक्षा विकास मंच बिलासपुर के द्वारा सरकारी शालाओं के प्रभावीकरण पर एक भागीरथ प्रयास के लिए पं. देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में व्यापम के सदस्य डाॅ. प्रफुल्ल शर्मा ने कहा सरकारी शालाओं के शिक्षक के पास गैर शासकीय कार्य अत्यधिक है, जिससे वे शिक्षण कार्य कम कर पाते हैं, जबकि प्राइवेट स्कूल के शिक्षक के पास केवल अध्यापन का दायित्व होता है। इससे वहां पालकों की रुचि होती है। बिलासा नागरिक मंच के सचिव श्रीवास्तव ने कहा कि प्रत्येक बालक को अपने क्षेत्र व संस्कृति का ज्ञान अवश्य दिया जाए ताकि बालक के मन में अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम जागृत हो। संगोष्ठी में डाॅ. राजकुमार सचदेव, प्रमोद दीक्षित, डाॅ. पोद्दार, डाॅ. वादे व डाॅ. रमन्नाराव, पूर्णिमा मिश्रा, वेदप्रकाश अग्रवाल, विनय तिवारी, राजेश शर्मा, सनत तिवारी, डाॅ. रेखा पालेश्वर, डाॅ. अनीता सिंह, डाॅ. चंद्रशेखर यादव, रमेश राजपूत आिद ने वक्तव्य दिया।

देवकीनंदन दीक्षित सभाभवन में हुई संगोष्ठी

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