पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Bilaspur
  • फर्जी मस्टररोल से निकाले सात लाख, कार्रवाई किसी पर नहीं

फर्जी मस्टररोल से निकाले सात लाख, कार्रवाई किसी पर नहीं

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जिले के लालपुर गांव में आर्थिक अनियमितता के लिए अफसर और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर फर्जीवाड़े की हदें पार कर दीं। उन्होंने गांव में कूप कराने के नाम पर जमीन का गलत खसरा नंबर बनाया। फर्जी मस्टरोल तैयार किया। जो व्यक्ति पूरे गांव में नहीं उसके कागज तैयार किए गए। इसके बाद सरकार की ओर से जनहित के लिए भेजे पैसे निकालकर गबन भी कर लिया। जब शिकायत हुई तब जांच और रिपोर्ट मांगी गई। गंभीर बात ये कि गड़बड़ी की पूरी रिपोर्ट भेजने के बाद मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई हुई है। कोई बताने को तैयार नहीं है। अफसर मामले को पुराना बताकर फाइल देखने की बात कह रहे हैं।

मामला वर्ष 2013 का है। रोजगार गारंटी योजना के तहत लालपुर गांव में कूप कराने के लिए सरकारी बजट भेजा गया। यहां के जिला पंचायत अफसरों ने काम का जिम्मा जनपद अधिकारियों के हवाले किया। अफसरों ने आरईएस सहित गांव के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक को इस काम की कमान सौंपी। हैरानी की बात यह कि कुंआ बनाने का सारा काम कागजों में कर लिया गया। अफसरों ने बिना जांच के इसके नाम पर सारे पैसों का भुगतान भी कर डाला। इसके बाद मामले की शिकायत हुई। तब तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश के बाद पूरे मामले की रिपोर्ट बनाकर एसडीएम सारांश मित्तर ने इसकी रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी। बताया गया है कि कैसे जनपद पंचायत सीईओ, आरईएस के अफसर और गांव के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक ने मिलकर फर्जीवाड़े के लिए एक कहानी तैयार की है।

ऐसे हुई गड़बड़ी

लालपुर में खसरा नंबर 188 की जमीन पर शुद्धू पिता जग्गू के नाम कूप निर्माण कराने की मंजूरी मिली। यहां चार साल पहले ही ये कुंआ मौजूद था। इसे ही सबने मिलकर नया बता दिया। इसके लिए बकायदा फर्जी मस्टर रोल बनाया गया और इसके नाम पर एक लाख रुपए निकाल लिए गए। तत्कालीन तहसीलदार ने इसकी रिपोर्ट एसडीएम के जरिए भेज दी है।

जमीन नहीं, पैसे निकले

यहीं के कमलेश पिता राम प्रसाद की जमीन खसरा नंबर 369/2 के नाम पर योजना के तहत निर्माण के लिए सहमति दी गई। दस्तावेजों में बताया गया कि यहां भी कुंए का निर्माण किया गया है। इसके उलट मौके की जांच में पाया गया कि कमलेश के नाम पर ऐसी कोई जमीन ही नहीं है और कुएं का नामोनिशान नहीं। दूसरे मामले को मिलाकर इसके नाम पर दो लाख रुपए निकाल लिए।

खबरें और भी हैं...