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जमीन विवाद और सुराज अभियान के सैकड़ों मामले लंबित, गांव में रात नहीं गुजार रहे जिम्मेदार,10 तहसीलदारों को कलेक्टर का नोटिस, पूछा- ऐसा क्यों?

3 वर्ष पहले
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सरकारी नियमों के मुताबिक हर तहसीलदार को अपने क्षेत्र में गांवों को चुन वहां रात गुजारनी है। ग्रामीणों की समस्याएं सुननी है। उनका निराकरण करना है। पर बिलासपुर और क्षेत्र के तमाम अधिकारी ऐसा नहीं कर रहे हैं। ग्राम सुराज अभियान के दौरान कलेक्टर ने सभी को इसके लिए निर्देश भी दिए। पर किसी ने पालन नहीं किया। इसके कारण यहां के 10 तहसीलदारों को नोटिस जारी का इसमें संदर्भ में जवाब मांगा गया है। फिलहाल अधिकारियों ने इसका जवाब नहीं भेजा है।

लोक सुराज अभियान का पहला चरण जनवरी में शुरू हुआ। नगरीय निकायों के साथ ही पंचायतों में भी सुराज दलों ने लोगों से आवेदन लिए। गोपनीय शिकायतों के आवेदन लेने के लिए पेटियां भी रखी गईं। कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में भी आवेदन लेने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। कमिश्नर व कलेक्टर ने केंद्रों में जाकर जायजा लिया। शुक्रवार को संभागायुक्त टीसी महावर और कलेक्टर पी. दयानंद ने मस्तूरी ब्लॉक के ग्राम पंचायत लगरा और मोपका में लोक सुराज अभियान के पहले दिन निरीक्षण किया। इसके अलावा कलेक्टर ने कोई साढ़े सात सौ गांवों में पसरी दिक्कतों को देखकर तहसीलदारों को वहां रात गुजारने और समस्याएं सुनने के निर्देश दिए। मंशा यही थी कि दिन में ग्रामीण काम पर जाते हैं। खेती किसानी के काम में उलझे होते हैं। इसके अलावा दूसरी तकलीफें होती हैं। इसके चलते ही अफसरों को खुद वहां रुककर लोगों की समस्या से रूबरू होने की बात कही गई थी। इसके उलट किसी अधिकारी ने इसका पालन नहीं किया। किसी ने कलेक्टर से इस बात की शिकायत कर दी। बताया गया कि सरकारी काम में लापरवाही बरतना अफसरों की आदत में शुमार हो चुका है। इसके कारण ही गांवों में कई तरह की दिक्कतें आम हो चली हैं। कलेक्टर ने इस बात को लेकर सभी तहसीलदारों से पूछा है कि उन्होंने गांवों में ग्रामीणों के साथ रात क्यों नही गुजारी? सरकारी निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया? लोगों की समस्याएं क्यों नही सुनी गईं? तहसीलदार जवाब बनाने की तैयारी में लगे हैं।

राजस्व संबंधी मामलों से अधिकारी परेशान, सरकारी निर्देशों का पालन करने को तैयार नहीं जिम्मेदार

जानिए, पेंडेंसी के कहां कितने मामले, निराकरण से दूरी बनाई जिम्मेदारों ने

कलेक्टर पी. दयानंद कुछ महीना पहले राजस्व विभाग में मिले आवेदनों पर पेंडेंसी पर नाराजगी जताई थी। तब राजस्व दफ्तरों में आवेदनों के यहां 1204, एसडीएम कार्यालय बिलासपुर में 204, एसडीएम कार्यालय मस्तूरी में 344, अतिरिक्त तहसीलदार गनियारी में 232, तहसीलदार बिलासपुर में 1136, तहसीलदार कार्यालय मस्तूरी में 735, प्रभारी अधिकारी भूअभिलेख में 759, प्रभारी अधिकारी भू अर्जन शाखा में 178, प्रभारी अधिकारी भू बंटन शाखा में 497 आवेदन आए थे। इनमें से एक का भी निराकरण नहीं हुआ। इसके चलते लोगों की परेशानी अभी तक बरकरार है।

प्रदेश में जमीन विवाद के प्रकरण है सवा लाख, इस बात पर भी अफसर चिंतित

सरकार की वेबसाइट के मुताबिक पूरे प्रदेश में जमीन विवाद के सवा लाख मामले लंबित हैं। बिलासपुर में सीमांकन की स्थिति सबसे खराब है। यहां अभी भी सात सौ मामले लंबित पड़े हैं। अफसर इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। तब इन्हीं परेशानी को देखकर राजस्व विभाग में नई व्यवस्था के तहत किसी भी केस पक्षकार को चार से अधिक पेशी नहीं देने की योजना तैयार की गई थी। ऐसा इसलिए किया ताकि कोई भी प्रकरण अधिक समय तक खींचा न जा सके। दूसरी ओर मामलों की सुनवाई कर रहे राजस्व अधिकारियों को ये हिदायत दी गई कि वे मामले में हीलाहवाला करने के लिए बहानेबाजी न करें। इसके बाद पेंडेंसी बढ़ रही है।

बिलासपुर, मस्तूरी, बिल्हा, तखतपुर, सकरी सहित सभी अफसरों को जारी किया कारण बताओ पत्र

नोटिस की बात मैंने भी सुनी है...

तहसीलदारों को नोटिस की बात मैंने भी सुनी है। मेरे पास ये पहुंचा नहीं है। राजस्व विभाग से सीधे उन्हीं को मिल हो गया। मुझे पता करना होगा। तब बता पाऊंगा। इससे ज्यादा इस सिलसिले में कोई जानकारी नहीं है। देवेंद्र पटेल, एसडीएम, बिलासपुर

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