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जांच में इंजीनियरों को बख्शा, अब घटिया निर्माण के ठेकेदारों से वसूली में कतराए

3 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर | बिलासपुर

गौरव पथ के निर्माण में भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार इंजीनियरों को जांच पर जांच के नाम पर बचाया जा रहा है और घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार 3 ठेकेदारों से वसूली में निगम के अफसरों के हाथ कांप रहे हैं। बता दें कि हाईकोर्ट ने गौरव पथ के निर्माण में भ्रष्टाचार के मामले में 5 साल तक चली सुनवाई के बाद 22 जून 2016 को सीधे राज्य शासन के प्रशासनिक प्रमुख चीफ सेक्रेटरी को जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। पूरे मामले में 3 ठेकेदारों के अतिरिक्त 20 अधिकारी जिनमें कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता सहित 20 लोग शामिल थे, दो साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। इनके खिलाफ जांच पर जांच चल रही है, परंतु उसे मुकाम हासिल नहीं हो पा रहा है। जिस अंदाज में इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई टाली जा रही है, उसी अंदाज में घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों से राशि वसूलने की बजाय फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। गौरव पथ के निर्माण में अनियमितता के मामले में हाल ही में चौथी जांच का जिम्मा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के चीफ इंजीनियर एसके जैन को सौंपा गया है। जिनके खिलाफ जांच की जानी है, उनमें कार्यपालन अभियंता यूजिन तिर्की, पीके पंचायती, गोपाल सिंह ठाकुर, सुरेश शर्मा, मनोहर श्याम उज्जैनी, ललित त्रिवेदी, राजकुमार साहू, एमपी साहू आदि शामिल हैं।

सब मिले हुए दिख रहे, इसलिए चल रहा बचाने का खेल

कांक्रीट की सड़क पर डामर

नर्मदा नगर पानी टंकी से लिया गया गौरव पथ का फोटो।

सिंप्लेक्स अग्रवाल इन्फ्रा बिल्ड और साईं कंस्ट्रक्शन पर करीब 2 करोड़ बकाया

गौरव पथ के घटिया निर्माण के मामले में सीवेज प्रोजेक्ट का कार्य कर रहे सिंप्लेक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रायवेट लिमिटेड सहित अग्रवाल इन्फ्रा बिल्ड और साईं कंस्ट्रक्शन पर करीब 2 करोड़ की वसूली के आदेश दिए गए थे। न्यायालय के आदेश पर घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों से राशि वसूल की जानी थी, परंतु दो साल बाद भी अब तक मामला नोटिस से आगे नहीं बढ़ पाया है। इसमें अकेले सिंप्लेक्स से 70 लाख की वसूली की जानी है।

प्रभारी को याद नहीं कितनी वसूली करनी है..?

दैनिक भास्कर ने सीवेज सेल के प्रभारी मनोरंजन सरकार से सिंप्लेक्स से की जाने वाली वसूली के बारे में जानकारी मांगी। जवाब था कि याद नहीं है, फाइल देखकर ही बताया जा सकता है। फाइल आएगी तो इनक्वायरी की जाएगी।

जांच से पहले ही क्लीनचिट की तैयारी थी

10 मार्च 2016 को नगर निगम के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता भागीरथ वर्मा को गौरव पथ के निर्माण में अनियमितता की जांच के आदेश दिए गए थे। जांच प्रतिवेदन में जिन बिन्दुओं पर जांच रिपोर्ट मांगी गई थी, उसमें एक सवाल ऐसा भी था, जिससे जांच अधिकारी से जांच के पहले ही क्लीन चिट देने का आग्रह नजर आता है। बिन्दु क्रमांक 2 में लिखा है-सड़क की स्थिति क्यों खराब है, जबकि उक्त कार्य की टेस्ट रिपोर्ट में कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक बताई गई है।

आरसीसी की कार्रवाई की जाएगी

सीधी बात

सौमिल रंजन चौबे, कमिश्नर, निगम

गौरव पथ के निर्माण में सिंप्लेक्स, अग्रवाल इन्फ्रा बिल्ड तथा साईं कंस्ट्रक्शन के घटिया निर्माण के लिए उनसे कितनी राशि की वसूली की जानी है?

-तीनों की अलग अलग राशि है। दफ्तर में फाइल देखकर एक्युरेट जानकारी दी जा सकती है।

वसूली के लिए क्या करेंगे?

-सिंप्लेक्स और साईं कंस्ट्रक्शन की राशि नगर निगम में जमा है। इनसे वसूली की जाएगी। अग्रवाल इन्फ्रा बिल्ड की कोई राशि निगम में जमा नहीं है, इसलिए इससे वसूली के लिए आरसीसी की कार्रवाई की जाएगी। इसमें नोटिस देकर वसूली तथा रकम नहीं जमा करने पर कुर्की तक की जा सकती है।

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