एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर
प्रकृति के 24 तत्वों से संबंध करके जीव बंधन में बंधता है। 24 तत्वों का बंधन ही मनुष्य में अहंकार पैदा करता है। अहंकार वह तत्व है जो ईश्वर से मनुष्य को दूर कर देता है। मनुष्य अहंकार में सबकुछ भूल जाता है। कई बार ऐसा होता है कि अहंकार मनुष्य के पतन का कारण भी बन जाता है। हमें अहंकार से बचना चाहिए। हमें अपने आप कार काबू रखना अाना चाहिए। उक्त बातें श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन वेदांताचार्य डाॅ. लक्ष्मण शरण ने कही। गोंड़पारा स्थित सीता-राम मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दूसरे दिन डॉ. शरण ने वाराह अवतार, कपिल उपदेश, दक्ष प्रसंग और जड़भरत चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार इंसान के पतन का कारण है। उन्होंने राजा दक्ष का यज्ञ और सती कथा प्रसंग पर कहा कि यज्ञ में भगवान शिव का आमंत्रण न दिए जाने पर कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया। इससे नाराज शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। दक्ष के अहंकार ने उनका पतन कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान सिर्फ भाव के साथ निर्मल मन चाहते हैं। निर्मल मन से भगवान की आराधना करने पर वह भक्त के सभी कष्टों को दूर कर देते हैं।
गोंड़पारा स्थित सीता-राम मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा कहते डॉ. लक्ष्मण और सुनते श्रद्धालु।