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सल्का व्यपवर्तन: सरकारी रिपोर्ट कह रही- 95 फीसदी काम पूरा सब ठीक, यहां नहरें अधूरी, किसानों को बूंद भर पानी नसीब नहीं

3 वर्ष पहले
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सल्का व्यपवर्तन योजना को बने 11 साल बीत चुके हैं। इतने साल में योजना का लाभ किसानों को मिल जाना था लेकिन सिर्फ सरकार के रुपए खर्च होते गए और अफसरों की लापरवाही से प्रोजेक्टर फेल हो गया। अफसरों ने कागजी आंकड़ों में काम पूरा हो जाने की बात कही है। जबकि हकीकत यह है कि नहरों का काम पूरा नहीं हुआ है। जिस ठेकेदार ने काम पूरा नहीं किया उसकी 40 लाख की रिकवरी तक अब तक नहीं हो पाई।

दरअसल सल्का व्यपवर्तन योजना में शुरुआत से ही अफसरों को सफलता पर संदेह था। तभी कुल 1960 हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए बनाई गई योजना में सिर्फ 560 हेक्टेयर में सिंचाई प्रस्तावित की गई । इसमें 11 साल बीत जाने पर भी एक बूंद पानी नहरों में नहीं आ पाया। सल्का व्यपवर्तन योजना में नहरें तक पूरी नहीं बन पाई। मुख्य नहर से मौके पर नाली नुमा नहर बनाई गई थी जिसे पूर्व में दैनिक भास्कर ने प्रकाशित भी किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद जांच चलती रही लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा। सिंचाई विभाग के अफसर सरकारी आंकड़ों में यह दावा कर रहे हैं कि शीर्ष व नहर का कार्य 100 फीसदी पूरा हो चुका है लेकिन हकीकत यही है कि पिछले एक साल में इस योजना में कोई काम नहीं हो पाया है। कागजों में काम पूरा दिखाने का दावा करने वाले अफसर मौके पर यह भी नहीं देखने जाते कि योजना की असल स्थिति क्या है। योजना की शुरूआत 20 अक्टूबर 2002 को हुई थी तब योजना की लागत 18 करोड़ थी लेकिन योजना में देरी होने से इसकी लागत 59 करोड़ 50 रुपए तक पहुंच गई। दरअसल जिन 14 गांवों के किसानों को लाभ देने के लिए यह योजना बनाई गई थी उस योजना के लिए किसान हर साल सिर्फ उम्मींद भरी नजर से ही देखते हैं। इन 14 गांवों में अमाली, कलारतराई, पीपरतराई, मोहन भाठा, बाकी घाट, खुरदुर, भरारी, पथर्रा, भुंडा, खरगहनी, नवापारा, लारीपारा, कलमीटार और भौंव्वाकापा शामिल हैं। अफसरों ने जानबूझर ठेकेदार से वसूली को गंभीरता से लिया है।

14 गांवों के किसानों को मिलना था लाभ, किसी भी ग्रामीण को आज तक नहीं मिला फायदा

आंकड़ों से समझिए, अधिकारी कैसे करते हैं खेल, भेजते हैं झूठे दस्तावेज

योजना की प्रशासकीय स्वीकृति-

18.80

करोड़

अफसरों ने दस्तावेजों में सल्का व्यपवर्तन योजना की नहर का 95 फीसदी काम पूरा होने का दावा किया है। जबकि हकीकत इससे दूर है। कई जगहों पर नहर का काम पूरा नहीं हो पाया है।

नहरों से खेती पर किसानों का उठा रहा भरोसा

किसानों की मानें तो उनका सरकारी योजनाओं से भरोसा उठ चुका है। अमाली के रहने वाले बबलू यादव का कहना है कि उसे कई साल बीत चुके नहरों का काम देखते लेकिन अब तक एक बूंद भी पानी नहीं आया। वे आगे का भरोसा किस आधार पर करें। इसी तरह मोहन भाटा के छेदी यादव का कहना है कि कुछ समय तक नहरों का काम हुआ अब फिर स्थिति जस की तस है। ऐसे में नहरों का काम कब पूरा होगा और किसानों के खेतों में पानी कब तक पहुंचेगा यह अब तक अनिश्चित है। भरारी के किसान रामकुमार साहू का कहना है कि सरकारी योजनाएं तो इसी तरह से चलती हंै। हम इससे ज्यादा की उम्मीद भी नहीं करते हैं। कभी खंडवर्षा और कभी अल्पवर्षा से फसल हर साल प्रभावित होती है। नहरों में पानी नहीं मिलने से रही सही उम्मीद भी खत्म हो जाती है।

योजना की मंजूरी-

16 मार्च

2007

पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति-

59.50

करोड़

पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति-

18 जुलाई 20

अब तक लागत-

59.50 करोड़

पीएमओ को भेजी जाती है रिपोर्ट

सल्का व्यपवर्तन योजना उन गिनी चुनी योजनाओं में से एक है जिसे लक्ष्य भागीरथी योजना के अंतर्गत रखा गया है । लक्ष्य भागीरथी योजना के अंतर्गत योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रधानमंत्री कार्यालय से होती है। हर 15 दिन में पीएमओ को योजनाओं की रिपोर्ट भेजी जाती है। यही वजह है कि विभाग के अफसरों ने सरकारी आंकड़ों में काम 100 फीसदी है लेकिन हकीकत में योजना में नहर तक नहीं बनी है।

सल्का व्यपवर्तन पर हमारी नजर

यह सही है कि योजना में देरी हुई है लेकिन याेजना में हमारी नजर है। अब व्यवस्थाओं में कसावट लाई जाएगी। समय तय कर उस पर काम किया जाएगा। मॉनिटरिंग भी लगातार होगी। - एके सोमावार, प्रभारी चीफ इंजीनियर, हसदेव कछार जल संसाधन विभाग

मार्च 2017 तक योजना पर खर्च-

58.95 करोड़

वर्ष 2017-18 का बजट-

90

लाख

रूपांकित सिंचाई क्षमता- 1960 हेक्टेयर

40 लाख की नहीं हो पाई है रिकवरी

नहर का काम अधूरा छोड़ने पर कोटा डिवीजन के अफसरों ने ठेकेदार एसपी सिंह पर 40 लाख की रिकवरी खारंग डिवीजन से करने की बात की थी। खारंग डिवीजन में ठेकेदार की राशि जमा होने से रिकवरी हो जाती यह भी अब तक नहीं हो पाई है। इधर दूसरी फर्म मित्तल कंस्ट्रक्शन पर जांच चलती रही लेकिन नतीजा पता नहीं चल सका। पिछले एक साल में योजना में कोई काम नहीं हुआ।

कुल सृजित सिंचाई क्षमता मार्च 2017 की स्थिति में-

1400 हेक्टेयर

वर्ष 2017-18 का प्रस्तावित सिंचाई क्षमता- 560

हेक्टेयर

इस अवधि में सिंचाई -

00 प्रति हेक्टेयर

योजना में लाभान्वित ग्राम- 14

सीधी बात

फंड मिलने के हिसाब से हुआ है 90 फीसदी काम

आरएस नायडू, ईई,कोटा डिवीजन, सिंचाई विभाग

सल्का व्यपवर्तन योजना में नहरें बनाने का काम पूरा हो गया?

- नहीं अभी तो जांच चल रही है।

क्या जांच चलने तक काम शुरू नहीं होगा?

- ऐसा नहीं है। फैसला आने दीजिए।

पिछले एक साल में कोई काम नहीं हुआ ?

- कई काम थे जिसके कारण योजना का काम नहीं हो पाया।

सल्का व्यपवर्तन योजना में नहरों का काम कितना बाकी है?

- हमें जितना फंड मिला है उसके हिसाब से हम 90 फीसदी काम पूरा कर चुके हैं।

ओवर आल नहरों का काम कितना बाकी है बताइए?

- नहरों का 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है।

हम तो मौके से देखकर आए हैं एक साल पहले वाली स्थिति है?

- हमने कहा ना फंड के हिसाब से हमने 90 फीसदी का काम किया है।

आप समेत कार्यालय में कोई आता नहीं तो योजनाओं की मॉनिटरिंग कैसे होगी?

- यह सही है लेकिन मेरी व्यस्तता रहती है अधीनस्थ अधिकारियों को रहना चाहिए।

मुख्य नहर की लंबाई-

21

किलोमीटर

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