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शिकायतकर्ता बोले- जिन अफसरों ने घोटाले किए वही बैठे बड़े पदों पर, पहले इन्हें हटाएं

3 वर्ष पहले
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सिम्स में 400 पदों पर हुए फर्जी भर्ती मामले में उस वक्त के कमेटी मेंबर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। दो अधिकारी जानकारी देने से बच रहे हैं। जबकि प्रभारी डीन रमणेश मूर्ति ने भर्ती से संबंधित दस्तावेज नष्ट हुए या नहीं इस बात की जानकारी प्रशासन से लेने की बात कही है। उनके मुताबिक ये सारा अधिकार डीन का होता है। वे फिलहाल इसके चार्ज में है। इसलिए उन्हें रिकॉर्ड से संबंधित किसी बात की जानकारी नहीं है। जबकि शिकायतकर्ता आज भी अपनी बात पर अड़े हैं। उन्होंने कहा है कि इसमें उन डॉक्टरों को पहले हटाना चाहिए जिन्होंने ये गड़बड़ी की है। इसके बाद इसकी जांच होनी चाहिए। सिम्स में वही लोग बड़े पदों पर बैठे हैं, जिन्होंने यह फर्जीवाड़ा किया है। इसके कारण जांच में सच सामने नहीं आ पा रहा है।

दैनिक भास्कर ने बुधवार को छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में हुए फर्जी भर्ती मामले से जुड़े तीन उन सदस्यों से बातचीत की जो तब चयन समिति का हिस्सा रहे हैं। पूर्व अधिकारी की अध्यक्षता में इन्होंने ही यहां बाकी का काम देखा है। इनमें प्रभारी डीन डॉ. रमणेश मूर्ति, डाॅ. बीआर सिंह और डॉक्टर भूपेंद्र कश्यप शामिल हैं। तीनों मामले से जुड़े सवालों पर अलग अगल बयान दे रहे हैं। डॉक्टर सिंह और कश्यप इसमें कुछ भी कहने से बच रहे हैं। वे साफतौर पर कहते हैं जानकारी नहीं है। जबकि प्रभारी डीन मूर्ति का कहना है कि वे प्रशासन से इस बात की जानकारी लेंगे कि भर्ती से जुड़े दस्तावेज नष्ट हो गए हैं या सही सलामत हैं। उन्होंने कलेक्टर की ओर भेजी गई रिपोर्ट के मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। जबकि शिकायतकर्ता आज भी अपनी बात पर अड़े हैं। संजीव पांडाल का कहना है कि सबूतों का नष्ट करने का काम सिम्स प्रबंधन में शामिल कुछ अधिकारियों ने मिलकर किया है। ये सबकुछ उन्हीं के इशारे पर हुआ है। इसके चलते कोई कुछ बोलने से कतरा रहे हैं।

400 पदों पर हुई भर्ती में अनियमितता को लेकर अब चयन समिति के सदस्य अनभिज्ञता जता रहे

भ्रष्टाचार की परतें खुली

भास्कर में लगातार प्रकाशित खबरें।

ये रहे चयन समिति के सदस्य

डॉ. रमणेश मूर्ति

गड़बड़ी करने वाले जांच को प्रभावित कर रहे

मामले को लेकर शिकायतकर्ता किशन निर्मलकर और संजीव पांडाल अभी भी मुखर हैं। निर्मलकर ने खुलकर कहा है कि जिन डाॅक्टरों ने ये गड़बड़ी की है आज वही बड़े पदों पर बैठे हैं। वही जांच को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। इसलिए पहले सरकार को इन्हें हटाना चाहिए। ताकि किसी तरह से कोई जांच प्रभावित न कर सके। उनका कहना है कि वे प्राथमिकता से इसी बात पर जोर देते आ रहे हैं। पर जानबूझकर कोई मामले में ध्यान देने को तैयार नहीं है।

दोषी डॉक्टर और कर्मचारियों में हड़कंप

केंद्र सरकार की ओर से गठित स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की जांच से सिम्स में हड़कंप मचा हुआ है। इससे चतुर्थ श्रेणी के उन कर्मचारियों को ज्यादा परेशानी हो रही है, जिन्होंने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है। अब उन्हें इस बात का डर सताने लगा है कि सही तरीके से जांच हुई तो उनकी गड़बड़ी सामने आ सकती है और ऐसे करने पर उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है। इतना ही नहीं इससे उन डॉक्टरों में भी भय है जिन्होंने कूटरचना और नियमों को तोड़कर गलत करने वालों का साथ दिया है। ऐसा क्यों किया गया है फिलहाल ये सवाल लोगों के जेहन में कौंध रहा है। उनका कहना है कि जल्द ही सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा।

डॉ. भूपेन्द्र कश्यप

डॉ. बीआर सिंह

सूचना के अधिकार में भी दी थी यही जानकारी

कतियापारा निवासी किशन निर्मलकर ने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन कर भर्ती संबंधी दस्तावेज मांगे थे। मामले में प्रशासन ने साफ तौर पर लिख दिया कि उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज नहीं है। इसके बाद ही निर्मलकर सहित अन्य लोगों ने इसकी शिकायत कई स्थानों पर कर जांच और कार्रवाई की मांग की। फिलहाल मामले में दूसरी जांच शुरू हो चुकी है। पीएमओ ने भी मामले में जवाब मांगा है। इसके चलते शिकायतकर्ताओं में न्याय की उम्मीद जगी है।

पता लगाएंगे दस्तावेज कहां हैं

सिम्स में 400 पदों पर हुई भर्ती के दस्तावेज हैं या नष्ट हो चुके हैं। इसकी जानकारी नहीं है। मैं फिलहाल डीन के चार्ज पर हूं। यानी प्रभारी डीन बना हूं। यहां के रिकॉर्ड और दूसरे चीजों की जानकारी फुल चार्ज डीन को होती है। फिर भी मैं सिम्स प्रशासन से इस बात पर बात करूंगा। जानकारी लूंगा कि दस्तावेज कहां हैं। डॉ. रमणेश मूर्ति, प्रभारी डीन, सिम्स

जांच अधिकारियों को बरगलाने के आरोप लगाए गए

सिम्स में फर्जी मामले में वही लोग बड़े पदों पर बैठे हैं, जिन्होंने यह गड़बड़ी की है। पहले इन्हें हटाना चाहिए। फिर जांच करनी चाहिए। रायपुर मेडिकल कॉलेज में पहले आरोपियों को हटाया गया था तब सारे तथ्य सामने आए थे। यहां यही लोग जांच और कार्रवाई को नहीं होने दे रहे। जांच करने वाले अफसरों को बरगला रहे। इसलिए फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाले यूं ही बैठे हैं। और किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। किशन निर्मलकर, शिकायतकर्ता

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