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आठ माह से खराब पड़ी सीसीएफ उड़नदस्ता की गाड़ी, कट रही अवैध लकड़ियां, सो रहे अफसर

3 वर्ष पहले
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सीसीएफ उड़नदस्ता की गाड़ी आठ माह से खराब है और जंगलों में वन माफिया बेखौफ होकर अवैध लकड़ियां काट रहे हैं। वन विभाग के अफसरों को जानकारी होने के बावजूद वे पूरे मामले में लापरवाही बरत रहे हैं। लमकेना और ग्राम सरवानी गांवों में ट्रक और ट्रैक्टरों में जब्त हुई लकड़ियों के बाद भी डीएफओ और सीसीएफ उड़नदस्ता वन माफियाओं पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है।

संभाग में वन माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए सीसीएफ और डीएफओ स्तर पर उड़नदस्ता बनाया गया है। इस उड़नदस्ता का काम ही अवैध लकड़ियां काटने वालों पर कार्रवाई करना है। यह जानते हुए भी अफसर पिछले छह माह से भी अधिक समय से खराब पड़ी उड़नदस्ता की गाड़ी को नहीं बनवा पा रहे हैं। इससे न तो जंगलों की मॉनिटरिंग हो पा रही है और न ही कार्रवाई हो रही है। इधर शुरुआती स्तर पर सक्रियता दिखाने के बाद डीएफओ उड़नदस्ता भी ठंडा पड़ गया है। डीएफओ उड़नदस्ता के वन अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे है। बिलासपुर सीसीएफ कार्यालय के पास फंड की भी कमी नहीं है इसके बाद भी अफसर सीसीएफ उड़नदस्ता की खराब गाड़ी को नहीं बनवा पा रहे हैं। आठ माह पहले सरगांव के पास सीसीएफ उड़नदस्ता का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। तब से वाहन को दुरुस्त नहीं कराया जा सका है।

लमकेना समेत दो गांवों में घट चुकी घटना

अब तक 15 ट्रैक्टर खम्हार और बांस जब्त हुई सरवानी से

वन विभाग के अफसर इन दो गांवों में ट्रैक्टर और ट्रकों में जब्त हुई लकड़ी के मामले में विभाग के अफसरों की उदासीनता पर अपनी सफाई दे रहे हैं। लमकेना से जहां 7 लाख की बेशकीमती लकड़ी पकड़ाई थी वहीं बिल्हा के सरवानी से अब तक 15 ट्रैक्टर खम्हार और बांस की लकड़ियां जब्त हुई हैं। बिलासपुर सर्किल के अधिकारियों की उदासीनता का फायदा वन माफिया उठा रहे हैं। सर्किल में किसी तरह की छापामार कार्रवाई नहीं होने से लकड़ियों की तस्करी बेखौफ हो रही है। लमकेना और सरवानी के उदाहरणों से साफ है कि मॉनिटरिंग नहीं कर रहे हैं।

2016 में 22 मामले और 2017 में बने 8 मामले

बिलासपुर सर्कल के उड़नदस्ते ने वर्ष 2016 में सिर्फ 22 मामले दर्ज किए हैं। इसके बाद वर्ष 2017 में सिर्फ 8 मामले बने हैं। पिछले छह माह में सर्किल उड़नदस्ता ने एक भी मामला नहीं बनाया है। मामला नहीं बनाए जाने के पीछे वाहन खराब होने का हवाला दिया जा रहा है। यही नहीं एक साल की अवधि में संभाग की करीब 300 आरा मिलों में एक भी मामला नहीं बना। वन विभाग बिलासपुर सर्कल के आंकड़े कहते हैं कि जंगलों से बेशकीमती लकड़ियों की तस्करी हो रही है। जंगल से लाई गई सागौन, साल, खम्हार और बीजा जैसी बेशकीमती लकड़ियों की तस्करी वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही है।

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हल्के में न लें वन विभाग के अफसर

लमकेना और सरवानी में बड़े पैमाने पर जब्त हुई लकड़ियों से उड़नदस्ता और विभागों के अफसर की कमियां उजागर हुई है। वे इन मामलों को हल्के में न लें। वे ध्यान दें कि उन्हें अपनी जिम्मेदारी हर हाल में पूरी करनी है। इन दोनों जगहों पर जब्त हुई लकड़ियों के मामले की जांच सिर्फ जांच तक सीमित नहीं होगी बल्कि कार्रवाई भी तय मानी जाए। -एसएस कंवर, डीएफअो, बिलासपुर वनमंडल

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