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सूखने लगे हैं तालाब, हैंडपंप 132 गांवों में संकट- पीएचई

3 वर्ष पहले
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गर्मी शुरू होते ही जिले के हैंडपंप ही नहीं तालाब और बांध भी सूखने लगे हैं। भू-जल विभाग ने पहले तखतपुर और बिल्हा इलाके के कई गांवों में इस बार जल संकट गहराने की चेतावनी दे दी है। इधर पीएचई खुद मान रहा है कि इस बार 132 गांवों में पेजयल संकट हो सकता है। यहीं कारण है कि विभाग इन गांवों की मॉनीटरिंग का दावा कर रहा है।

अभी अप्रैल का पहला पखवाड़ा ही चल रहा है और और भू-जल स्तर नीचे 350 फीट तक नीचे चला गया है। देवरीखुर्द इलाके में 600 फीट भू-जल स्तर पहुंचने की बात कही जा रही है। वहीं कई गांवों से रोजाना हैंडपंप सूखने की शिकायतें पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग स्थित पीएचई कार्यालय में पहुंच रही है। पिछले साल से तुलना करें तो इस बार 11 इंच कम बारिश हुई है। इसकी वजह से पहले लोगों की खेती पर असर पड़ा। हजारों हेक्टेयर खेत सूखे की चपेट में आए और अब गर्मी में जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतम तापमान में वृद्धि के साथ ही धूप तेज होती चली गई। नतीजा तालाब और कुएं तेजी से सूख रहे हैं। अधिकांश, एनीकट और चेक डेम में भी पानी नहीं बचा है। अप्रैल में ऐसी स्थित है तो मई व जून में क्या होगा, अनुमान लगाया जा सकता है। इधर पीएचई ने जिले के ऐसे 132 गांवों की सूची तैयार की है जहां इस बार जल संकट गहरा सकता है। इसमें बिल्हा ब्लॉक के सबसे ज्यादा 51 तो मस्तूरी व तखतपुर के 25-25 गांव शामिल है। इसी तरह मरवाही के 11, गौरेला के 14 तो पेंड्रा के 6 गांव शामिल है। कोटा का कोई गांव लिस्ट में नहीं है। इन गांवों में कुल 1993 हैंडपंप है जिनमें से 322 हैंडपंप सूख चुके हैं। भू-जल विभाग ने पहले ही चेतावनी दे दी है। भूजल विभाग के विशेषज्ञ अधिकारी नितिन मेश्राम के मुताबिक बिल्हा, तखतपुर ब्लॉक के कई गांवों को इस बार संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। इन गांवों में पानी की समस्या बेहद गंभीर रहने वाली है। इधर ग्रामीण पानी की समस्या को लेकर जिला प्रशासन के पास पहुंचने लगे हैं।

भूजल स्तर गिर रहा
मंगला का पटवारी तालाब सूख गया।

428 हैंडपंप बंद, पानी की जगह निकल रही हवा
जिले में 645 ग्राम पंचायतें है जिनमें से 929 गांव है। वहां 12 हजार 386 हैंडपंप हैं इनमें से 428 बंद है जबकि 11 हजार 958 हैंडपंप चालू है। इसमें से 322 भू-जल स्तर गिरने की वजह से बंद है जबकि 106 हैंडपंप कई कारणों से बंद है। बिल्हा ब्लॉक में 98, मस्तूरी में 90, तखतपुर ब्लॉक में 106, कोटा ब्लॉक में 18, गौरेला में 47, पेंड्रा में 26 तो मरवाही ब्लॉक में 43 हैंडपंप से पानी नहीं निकल रहा है।

नलकूप खुदाई की अनुमति नहीं ले रहे
कलेक्टर पी.दयानंद ने जिले को जलाभाव ग्रस्त क्षेत्र घोषित कर रखा है। उन्होंने ट्यूबवेल खुदाई से पहले प्राधिकृत अधिकारियों से अनुमति लेने कहा है। एसडीएम प्राधिकृत अधिकारी बनाए गए हैं। सरकारी विभागों को नलकूप खुदाई के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। इस आदेश का लोग पालन नहीं कर रहे हैं और अवैध रूप से ट्यूबवेल खोद रहे हैं।

मनियारी-घोंघा में पिछले साल से भी कम पानी
मुंगेली जिले के लोरमी इलाके के मनियारी यानी राजीव गांधी जलाशय में पिछले साल 74 फीसदी पानी था जबकि घोंघा में 42 फीसदी पानी था। इस बार मनियारी में 39.90 फीसदी तो घोंघा में 37.91 फीसदी पानी है।

एहतियात के तौर पर सूची बनाई
इन गांवों में अभी पानी की समस्या नहीं है। हैंडपंप खराब है या उनमें पानी नहीं निकल रहा है पर उससे ज्यादा वहां चालू हैंडपंप है। इन गांवों को हमने एहतियात के तौर पर शार्ट लिस्ट किया है। पीएस कतलम, ईई, पीएचई

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