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रतनपुर नपा अध्यक्ष को रिकॉल के खिलाफ 4 पार्षदों की चिट्‌ठी पर कलेक्टर को पुनर्विचार के निर्देश

3 वर्ष पहले
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रतनपुर नगर पालिका अध्यक्ष को हाईकोर्ट से राहत मिली है। पूर्व में 13 पार्षदों ने अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए कलेक्टर के पास प्रस्ताव रखा था। कलेक्टर ने सभी पार्षदों का पक्ष सुनने व हस्ताक्षर की पुष्टि करने के बाद अध्यक्ष को पद से हटाने की अनुशंसा करते हुए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा। इधर, चार पार्षदों ने कलेक्टर को पत्र लिखकर गलतफहमी में प्रस्ताव का समर्थन करने और अपना नाम वापस लेने की जानकारी दी, लेकिन कलेक्टर ने इस पर विचार नहीं किया। इस पर अध्यक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।

बिलासपुर जिले की रतनपुर नगर पालिका के लिए 4 जनवरी 2015 को आशा सूर्यवंशी अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुई थीँ। 13 पार्षदों ने 17 जुलाई 2017 को उन्हें पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, इस पर राज्य शासन की तरफ से बताया गया था कि प्रस्ताव वापस ले लिया गया है। वर्तमान में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लंबित नहीं है। बाद में 31 अगस्त 2017 को 13 पार्षदों ने फिर से अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कलेक्टर ने नगर पालिका के सीएमओ से जानकारी मंगाई। दो साल का कार्यकाल पूरा होने की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर ने 6 नवंबर 2017 सुनवाई की तारीख तय की। सभी पार्षदों ने उपस्थित होकर प्रस्ताव की पुष्टि की। इसके बाद दो बार फिर से सुनवाई की गई। संतुष्टि के बाद कलेक्टर ने 23 दिसंबर 2017 को अध्यक्ष को पद से हटाने की अनुशंसा करते हुए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा। बाद में इसे राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया गया। आयोग ने नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का कार्यक्रम जारी किया। अध्यक्ष के मुताबिक उन्हें इसकी सूचना अखबारों में प्रकाशित खबरों से मिली। इधर, 5 फरवरी 2018 को 13 में से चार पार्षदों ने कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया और कहा कि उन्होंने गलतफहमी में प्रस्ताव का समर्थन किया था। वे अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, लेकिन कलेक्टर ने उनके आवेदन पर विचार नहीं किया। इस पर सूर्यवंशी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इस पर जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने निर्णय में कहा है कि छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 47(2) के तहत राज्य शासन को भेजे गए प्रस्ताव का पुनर्विचार करने की शक्ति तथा क्षेत्राधिकार है। हाईकोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर चार पार्षदों के आवेदन पर विचार कर, उनका बयान दर्ज करने के बाद राज्य शासन को दूसरा प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। राज्य शासन और राज्य निर्वाचन आयोग को कलेक्टर के दूसरे प्रस्ताव पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

पहले 13 पार्षदों ने अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए प्रस्तुत किया था प्रस्ताव
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