खेल के माध्यम से छात्र जानेंगे तनाव से दूर रहना
एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर
सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्र मानसिक तनाव के कारण गलत कदम उठा रहे हैं। जबकि यूनिवर्सिटी में मनोवैज्ञानिक केंद्र बना हुआ है। फॉरेस्ट्री हॉस्टल में घटना होने के बाद यूनिवर्सिटी ने अब छात्रों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र द्वारा कार्यक्रम कराने का निर्णय ली है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 16 व 17 अप्रैल को मनोवैज्ञानिक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की राज्य समन्वयक, रायपुर डाॅ. सुमी जैन शामिल हो रही हैं।
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्रों के लिए कार्यक्रम का आयाेजन किया जा रहा है। कार्यक्रम 16 व 17 अप्रैल को होगा। मनोवैज्ञानिक केंद्र का उद्घाटन सुबह 11 बजे किया जाएगा। प्रशिक्षण शिविर ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग में होगा। इसका उद्घाटन डॉ. सुमी जैन करेंगी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कुलपति प्रोफेसर अंजिला गुप्ता हैं। विशिष्ट अतिथि राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय, बिलासपुर के अधीक्षक डॉ. बीआर नंदा हैं। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशांत पाण्डेय, डीएमपी, बिलासपुर और नीरज शुक्ला, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के रूप में सम्मिलित होंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सेंट्रल यूनिवर्सिटी और राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय, बिलासपुर के संयुक्त तत्वाधान में हो रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम तनाव प्रबंधन विषय पर सुबह 11 से शाम 4 बजे तक ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग में छात्रों को खेल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं 17 अप्रैल को आत्महत्या नियंत्रण विषय पर सुबह 11 से शाम 4 बजे तक ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग में सभी विभागों से एक-एक छात्र और छात्रा को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में शामिल होने विभिन्न विभागों से नामित शिक्षकों व छात्र-छात्राओं के नाम मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र को प्राप्त हो गए हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र की समन्वयक प्रोफेसर प्रतिभा जे. मिश्रा के अलावा सदस्य शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. पायल बनर्जी और अंग्रेजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रसेनजीत पाण्डा भी शामिल हैं। विश्वविद्यालय का मनोवैज्ञानिक परामर्श केन्द्र छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों को तनाव मुक्त वातावरण में प्रसन्नचित्त रहते हुए जीवन जीने के तरीके सिखाता है। साथ ही छात्र-छात्राओं से संवाद स्थापित कर उन्हें खेल खेल के माध्यम से तनाव और अवसाद से दूर रहने के तरीके बताता है।