मप्र-ओडिशा में पक्की नौकरी आसान इसलिए 52 संविदा डॉक्टर वहां जा रहे, यहां भर्ती की पॉलिसी तक नहीं बनी
रायपुर सहित राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों के 52 संविदा डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ने की पेशकश कर दी है। डॉक्टरों ने मप्र और ओडिशा के मेडिकल कॉलेजों में नौकरी की अर्जी देने के लिए एनओसी मांगी है। इनमें स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी शामिल हैं। थोक में इतने डॉक्टरों की नौकरी छोड़ने के आवेदन से स्वास्थ्य विभाग के अफसर हैरान-परेशान हैं। एक साथ 52 डॉक्टरों के नौकरी छोड़ देने से राजनांदगांव और रायगढ़ जैसे मेडिकल कालेजों की मान्यता बचाना मुश्किल हो जाएगा।
राज्य में अभी रायपुर और बिलासपुर को छोड़कर ज्यादातर मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की जबरदस्त कमी है। रायपुर और बिलासपुर में भी निर्धारित मापदंडों के अनुसार डॉक्टर नहीं है। किसी न किसी विभाग में डॉक्टर कम हैं। सबसे ज्यादा बुरी स्थिति राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज की है। यहां के 23 डॉक्टरों ने कॉलेज प्रबंधन को पत्र लिखकर एनओसी मांगी है। रायगढ़ दूसरे नंबर पर है। यहां के 16 डॉक्टर मप्र या ओडिशा जाकर वहां नौकरी ज्वॉइन करने की तैयारी कर चुके हैं। अंबिकापुर के चार, बिलासपुर क 2, जगदलपुर के 3 डॉक्टरों ने एनओसी मांगी है। डॉक्टरों ने अलग-अलग समय में अपने कॉलेजों के डीन को चिट्टी लिखी है। उनकी चिट्ठियों के बारे में धीरे-धीरे बात सामने आई। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसर मान रहे हैं कि थोक में इतने डॉक्टरों के जाने से दो-तीन मेडिकल कॉलेजों की मान्यता को लेकर परेशानी बढ़ सकती है।
प्रदेश के सरकारी कॉलेज
में डॉक्टरों की स्थिति
कॉलेज वर्तमान संख्या कमी
रायपुर 200 50
अंबिकापुर 70 30
रायगढ़ 65 40
बिलासपुर 100 125
राजनांदगांव 80 75
जगदलपुर 65 67
नियमित नौकरी, सुविधाएं बढ़ेंगी इसलिए छोड़ेंगे
ओडिशा व मप्र के मेडिकल कॉलेजों में कॉलेज की स्वशासी समिति डॉक्टरों का इंटरव्यू या उम्मीदवार ज्यादा होने पर लिखित परीक्षा देकर सीधे परमानेंट नौकरी दे रही है। वहां हर माह वॉक इन इंटरव्यू हो रहे हैं। इससे डॉक्टरों के पास नियमित, स्थाई नौकरी पाने के ज्यादा विकल्प हैं। परमानेंट नौकरी में डॉक्टरों को उतने ही घंटे ड्यूटी देनी होती है, जितनी संविदा में। पर बाकी सुविधाएं मिलने लगेंगी। गर्मियों में एक माह का समर वेकेशन लीव मिलेगा, जबकि संविदा डॉक्टरों को 18 दिनों का ही सालभर में सीएल मिल रहा है। आवास सुविधा नहीं मिलती है।
एनओसी जरूरी, मांग रहे अनुमति
सरकारी संस्थान में सेवाएं देने के कारण डॉक्टरों को शासन से नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेना जरूरी है। इस वजह से डाक्टरों को कॉलेज के डीन से अनुमति लेना जरूरी है। इसे लेकर कई डॉक्टरों ने आवेदन भी लगा दिए हैं।