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ट्रांजिट हॉस्टल के लिए मिले 50 लाख रुपए का 8 साल बाद भी पता नहीं

3 वर्ष पहले
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ट्रांजिट हॉस्टल की 50 लाख की राशि का क्या हुआ इसकी जानकारी वन विभाग के अफसर नहीं दे पा रहे हैं। अफसर नई पदस्थापना का हवाला दे रहा है और कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। विभाग के सचिव ने नए डीएफओ आने के बाद यहां हुए घोटालों पर कार्रवाई करने की बात कही थी।

वन विभाग के सचिव ने विभाग में चल रहे घोटालों के संदर्भ में नए डीएफओ के आने के बाद जांच पूरी होने की बात कही थी लेकिन वह भी फिलहाल पूरी होती नजर नहीं आ रही है। बिलासपुर वन मंडल में आठ साल बाद भी ट्रांजिट हॉस्टल नहीं बन सका है। इसके लिए दी गई 50 लाख की राशि के बारे में अधिकारी कुछ बता नहीं पा रहे हैं। इस मामले में शुरू से अफसर परदा डाल रहे हैं। मामला तत्कालीन रेंजर पर डाला जा रहा है, लेकिन अधिकारी यह नहीं बता पा रहे हैं कि तत्कालीन रेंजर कौन हैं। वर्ष 2009-10 में राशि दी गई थी। ट्रांजिट हॉस्टल कोनी में बनना था। वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए संभागीय मुख्यालय बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, दुर्ग एवं रायपुर में छात्रावास की सुविधा मुहैया कराने के लिए ट्रांजिट हॉस्टल की योजना बनाई गई थी। लगातार तबादलों के बीच ट्रांजिट हॉस्टल में अपने बच्चों को रखकर कर्मचारी पूरी तरह अपनी जिम्मेदारी निभाते, वहीं बच्चों को भी पूरी सुविधा मिलती। विभाग के यह योजना अधिकारियों की मनमानी की भेंट चढ़ गई। ट्रांजिट हॉस्टल बनता तो कई कर्मचारियों के बच्चों को हॉस्टल की सुविधा मिलती।

फाइल देखना पड़ेगा
मुझे अभी आए एक सप्ताह ही हुआ है । मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। मैं इस मामले में फाइल देखकर ही वर्तमान स्थिति के बारे में बता सकूंगा। -एसएस कंवर, डीएफओ, बिलासपुर वनमंडल

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