योजनाएं शुरू तो कीं, लागू करना भूला सिम्स प्रबंधन
संभाग के एक मात्र मेडिकल कॉलेज छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में मामूली सुविधाओं के अभाव में मरीजों काे समय पर इलाज नहीं मिल रहा है। यहां शहर सहित आसपास जिले के बड़े संख्या में मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं। प्रबंधन हमेशा दावा करता है कि यहां प्रतिदिन ओपीडी व भर्ती मरीजों सहित 12-15 सौ मरीजों की जांच व इलाज होता है। प्रबंधन ने सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे भी किए। साथ ही इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की बात भी की। लेकिन हकीकत कोसों दूर हैं। दैनिक भास्कर आपको ऐसे पांच सुविधाएं बता रहा जो यहां शुरू तो हुई, लेकिन उसकी हालत बेहद खराब है।
मरीजों के बेहतर इलाज के लिए सिम्स प्रबंधन ने पांच सुविधाएं शुरू कीं, मरीजों को नहीं मिल रहा फायदा
सिम्स में तीन महतारी एक्सप्रेस खड़ी हुई थी।
मरीजों के लिए पूछताछ केंद्र
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मरीजों को वार्डों व जांच कक्ष के बारे में बताने के लिए एमआरडी हाल में पूछताछ केंद्र स्थापित की गई। पर प्रबंधन डेस्क में कर्मचारी की नियुक्ति करना भूल गए। लिहाजा वहां कोई कर्मचारी नहीं रहता। कोटा निवासी सुरेश कुमार को इमरजेंसी मेडिकल वार्ड जाना था। पहली बार आने के कारण उसे समझ नहीं आ रहा था। पूछताछ केंद्र में कोई बताने वाला नहीं था।
मरीजों को मिल रही सभी सुविधाएं
मुफ्त में ब्लड देने की सुविधा
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सिम्स प्रबंधन ने बैठक में निर्णय लिया था कि गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में ब्लड उपलब्ध कराया जाएगा। इसका फायदा मरीजों को नहीं मिल रहा है। बिहार निवासी सरिता लेबर वार्ड में भर्ती है। आपरेशन के दौरान उसे तीन यूनिट ब्लड की जरूरत थी। परिजनों ने दो यूनिट की व्यवस्था कर ली लेकिन एक यूनिट के लिए उसे परेशान होना पड़ा।
इमरजेंसी में सभी मरीजों को मुफ्त में ब्लड दिया जा रहा है। सीनियर सिटीजन को तुरंत इलाज भी मिल रहा है। मरीजों की मदद करने वाले सोशल वर्कर बेहतर काम कर रहे हैं। जल्द ही आंतरिक निवारण समिति की बैठक लेंगे। -डॉ. रमणेश मूर्ति, प्रभारी एमएस सिम्स
सोशल वर्कर की नियुक्ति
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सिम्स में पांच सोशल वर्करों की नियुक्ति की गई है, ताकि मरीजों को इधर-उधर भटकना न पड़े। चकरभाठा निवासी रामनाथ बिंझवार अपनी प|ी की जांच कराने सिम्स आए। केजुअल्टी वार्ड से उसे 12 नंबर कमरा भेज दिया। कमरे की तलाश में उसे भटकना पड़ा।
बुजुर्गांें को सुविधा
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प्रबंधन ने 60 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों को इलाज के लिए लंबी लाइन में खड़े होने की जरूरत न पड़े, इसलिए उन्हें पहली प्राथमिकता देने की व्यवस्था शुरू की। सीनियर सिटीजन मरीज बारी का इंतजार करते लाइन में खड़े रहते हैं।
समिति की बैठक
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सिम्स की आंतरिक समस्याओं का निराकरण के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर आंतरिक निवारण समिति का गठन किया गया। प्रत्येक महीने की पहली सप्ताह में बैठक आयोजित करके कोर्ट को अवगत कराने के आदेश हैं, पर प्रबंधन तय समय पर समिति की बैठक आयोजित नहीं करता। इस वजह से कई समस्याएं महीनों से पेंडिंग है।