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हर जांच में सिर्फ एक ही बात, दस्तावेज नष्ट हो गए, जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं

3 वर्ष पहले
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छह साल पहले की बात है। सिम्स प्रबंधन ने वर्ष 2012-13 में चतुर्थ श्रेणी के 400 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन दिया। तब हजारों की तादाद में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। उन्हें इस बात का भरोसा था कि पात्र कर्मचारियों को नौकरी मिलेगी। वो भी सरकारी। सबकुछ नियमों के तहत हुआ तो करियर बनाने के चांस हैं। इसके उलट सिम्स प्रबंधन ने कई अपात्रों को नौकरी का हिस्सा बना डाला। सरकारी नियमों को ऐसे तोड़ा जैसे कोई खेल हो। नतीजे आने पर पता चला कि यहां चयनकर्ताओं ने रिश्तेदारों सहित करीबियों को नौकरी देकर कई तरह के फर्जीवाड़े किए हैं। आरोप लगे कि कई मामलों में खुला लेनदेन चला है। इसके बाद ही उन 50 कर्मचारियों में आक्रोश फूट पड़ा। जिन्होंने नौकरी की आस लेकर आवेदन किया था। ये वो कर्मचारी थे, जो कोई दस साल से यहां विभिन्न पदों पर काबिज रहे। किसी ने वार्ड ब्वाय का काम देखा। किसी ने दूसरी तरह के कई काम किए। पर उनमें किसी का नाम यहां चयनित उम्मीदवारांे की सूची में शामिल नहीं था। इसके बाद इनका माथा ठनका। इन्होंने भर्ती संबंधी दस्तावेज निकलवाया। सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया। प्रधानमंत्री, राज्यपाल, और लोकायोग तक शिकवे-शिकायतों का दौर चला। प्रबंधन को इसकी भनक लग चुकी थी कि वे पकड़े जा सकते हैं। इसलिए अफसरों ने बड़ी चतुराई से काम लिया। अफसरों की गैरमौजूदगी में सिम्स के एक कर्मचारी ने उस रिकार्ड रूम में आग लगा दी, जहां इन कर्मचारियों के सबूत रखे हुए थे। कुल मिलाकर सबूत नष्ट और किसी पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं।

घोटाले की शिकायत इन्होंने की।

छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में वर्ष 2012-13 के दौरान हुए भर्ती घोटाले की वो सारी कहानी जो आप जानना चाहते हैं...

जानिए किसकी शिकायत पर पीएमओ ने दिए जांच के निर्देश

फिलहाल जो जांच टीम गठित हुई वो केंद्र सरकार के निर्देश के बाद की गई है। इसमें सरकारी बड़े अफसर शामिल हैं। इसकी शिकायत संजीव पांडाल नामक उस शख्स ने की है जो यहां एनमिल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत रहे हैं। यह पद मेडिकल कॉलेज के छात्रों की जांच के लिए खरगोश, चूहे सहित अन्य जीवों की देखभाल करने के लिए होता है। इन्हें भी उस दरमियान प्रबंधन ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था, जब चतुर्थ श्रेणी की भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई। आरोप है कि इन्हें भी सिम्स प्रबंधन ने कई तरह से प्रताड़ित किया है। नोटिस सहित दूसरी चेतावनी दी गई है। इसके बाद भी वे गड़बड़ी के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

देखिए, कैसे नौकरियां बांटने के लगे आरोप

शपथ पत्र लेकर नौकरी दी

सिम्स में लैब अटेंडेंट के पद पर एक महिला ने आवेदन किया। उन्होंने सिम्स प्रबंधन को बताया कि उनका जाति प्रमाण पत्र गुम गया है। तत्कालीन अफसरों ने उनसे शपथ पत्र ली और उन्हें लैब अटेंडेंट के पद पर नौकरी दे दी। इसी तरह की दूसरी गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है। इसमें भी बताया गया कि नियमों को दरकिनार कर सिम्स ने ऐसे कर्मियों पर मेहरबानी दिखाई है।

केस-1

चार वे किरदार जो भर्ती कमेटी के सदस्य

सिम्स के एक पूर्व अधिकारी अध्यक्ष रहे। उनकी निगरानी में ही ये सारी भर्तियां हुई हैं। इसके अलावा भर्ती कमेटी के सदस्यों में प्रभारी डीन डॉ. रमणेश मूर्ति, डॉक्टर अर्चना सिंह, डॉक्टर भूपेंद्र कश्यप और बीआर सिंह इसके सदस्य रहे हैं। फिलहाल डीन की गैरमौजूदगी में डॉ. मूर्ति सिम्स का पूरा काम संभाल रहे हैं।

अभिमत नहीं दे सकते

सबसे पहले मामले पर लोकायोग ने संज्ञान लिया। कलेक्टर ने जांच टीम गठित की। वर्ष 2013 में जांच शुरू हुई। तत्कालीन अपर कलेक्टर नीलकंठ टेकाम को जांच का जिम्मा सौंपा गया। तीन साल की जांच के बाद आखिरकार वही रिपोर्ट सामने आई कि कर्मचारियों से संबंधित दस्तावेज नष्ट हो चुके हैं। किसी तरह का अभिमत नहीं दे सकते। इस आशय की रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई।

बिना सत्यापन के दिए काम

अस्पताल में भर्ती के दौरान एक युवक ने वार्ड ब्वाय पद के लिए अनुसूचित जाति वर्ग से आवेदन किया था। परंतु आवेदन में वार्ड ब्वाय को काटकर किसी अन्य की हस्तलिपि से स्वीपर लिखकर इसके अनारक्षित पर उनकी नियुक्ति कर दी गई। इसी तरह एक और महिला को बिना प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बिना नौकरी मिली है। इसकी पूरी रिपोर्ट जांच कमेटी से लोकायोग को भेज दी थी।

केस-2

गड़बड़ी के ये हैं आरोप

भर्ती प्रक्रिया के दौरान चयन व दावा आपत्ति सूची जारी नहीं की गई। लिखित परीक्षा की उत्तर पुस्तिका में अभ्यर्थियों का हस्ताक्षर नहीं लिया गया। आरक्षण नियमों का पालन नहीं हुआ। दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई। रिक्तियों से अधिक भर्ती की गई। सिम्स के अधिकारियों व उनके करीबी कर्मचारियों ने 80 से 90 पदों पर रिश्तेदारों की भर्ती कराई।

रिश्तेदार फार्मासिस्ट बने

सिम्स में बिना योग्यता एक युवक को फार्मासिस्ट बनाया गया है। वे लिपिक एक लिपिक के रिश्तेदार हैं। 27 जुलाई 2012 को निकले विज्ञापन के मुताबिक इस पद के लिए जीव विज्ञान रसायन और हायर सेकेंडरी उत्तीर्ण होने की योग्यता मांगी गई। युवक गणित विषय में 12वीं पास होने के बाद फार्मासिस्ट बना दिए गए। इसके बावजूद कहीं किसी के खिलाफ एफआईआर नहीं।

केस-3

नौकरी देने कूटरचना

अस्पताल में भर्ती के दौरान जोगेंद्र सोनवानी ने वार्ड ब्वाय पद के लिए अनुसूचित जाति वर्ग से आवेदन किया था। परंतु आवेदन में वार्ड ब्वाय को काटकर किसी अन्य की हस्तलिपि से स्वीपर लिखकर इसके अनारक्षित पद पर उनकी नियुक्ति कर दी गई। इसी तरह एक और महिला को बिना प्रमाण पत्रों के सत्यापन के नौकरी मिली है। इसकी पूरी रिपोर्ट जांच कमेटी से लोकायोग को भेज दी है।

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