पारंपरिक व्यंजन को बढ़ावा देने बीयू में राष्ट्रीय संगोष्ठी कल से
एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर
जंक फूड और पौष्टिक भोजन एक दूसरे के विरोधी हैं, जो पोषक तत्वों और कैलोरी के कारण एक-दूसरे के साथ संघर्ष करते रहे हैं। हम जानते हैं कि पौष्टिक भोजन हमारे शरीर के लिए अच्छा है, लेकिन फिर भी अगर जंक फूड और पौष्टिक भोजन के बीच चुनाव करना हो तो हम जंक फूड ही चुनते हैं। हम फलों के सलाद की बजाय एक बर्गर लेना पसंद करते हैं। लोगों का इस तरह से निर्णय ही उन्हें बीमार बना रहा है। जबकि हर जगह के पारंपरिक भोजन शरीर के लिए फायदेमंद हैं। फास्ट फूड की जगह पारंपरिक व्यंजन को बढ़ावा देने बिलासपुर यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 19 व 20 अप्रैल को किया जा रहा है। इसको लेकर यूनिवर्सिटी में तैयारी पूर्ण कर ली गई है। राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए विभिन्न राज्यों से 150 आवेदन आ चुके हैं। बिलासपुर यूनिवर्सिटी के फूड एंड प्रोसेसिंग विभाग द्वारा पारंपरिक भोजन को कैसे बढ़ावा दें विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 19 व 20 अप्रैल को किया जा रहा है। इसमें पारंपरिक भोजन को मार्केट में कैसे लाएं और उसकी मार्केटिंग कैसे करें, जिससे लोग जंक फूड छोड़कर इसकी तरफ आकर्षित हों के बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को पर्याप्त मात्रा में उनके शरीर के लिए विटामिन, वसा, कैलोरी मिल सके और वह स्वस्थ्य रहें भी है। कार्यशाला में जबलपुर, ग्वालियर, दिल्ली, जोधपुर, महाराष्ट्र, बस्तर के प्राध्यापक भाग ले रहे हैं। सहायक प्राध्यापक यशवंत पटेल ने बताया कि जंक फूड में कैलोरी, वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा पाई जाती है, यह पौष्टिक भोजन की तुलना में बहुत जल्दी तैयार भी हो जाता है।