मुख्यमंत्री की नाराजगी, कलेक्टर की चिटि्ठयां भी नहीं आई काम, कंपनी ने नहीं दिया क्लेम
प्रशासनिक रिपोर्टर | बिलासपुर
मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने फसल बीमा कंपनी के अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई थी और कलेक्टर तो अब तक कई चिट्ठियां लिख चुके हैं, इसके बावजूद अब तक बीमा कंपनी ने किसानों को क्लेम नहीं दिया है। उप संचालक कृषि की तो बीमा कंपनी के अधिकारी परवाह ही नहीं करते।
बीते खरीफ सीजन में जिले के 62 हजार 550 किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया। 6 करोड़ 63 लाख 76 हजार 331 रुपए प्रीमियम इफको टोकियो कंपनी को दिया। कम बारिश की वजह से जिले के अधिकांश इलाकों में सूखे का अंदेशा जताया गया। तब जिला प्रशासन ने नजरी आनावारी के आधार पर जिले को सूखा घोषित किया। फसल कटाई प्रयोग व आनावारी से सूखे की पुष्टि हो गई। पता चला कि जिले में 45 पैसा आनावारी है। बिलासपुर जिले के 84,803 किसान सूखे से प्रभावित हुए और 60,908 हेक्टेयर में लगी धान की फसल को नुकसान हुआ। किसानों को 47.85 करोड़ रुपए मुआवजा देना तय किया गया। अधिकांश किसानों को मुआवजा दिया चुका है लेकिन बीमा कंपनी ने अप्रैल आने पर भी क्लेम की रकम तय नहीं किया है। बता दें कि जब लोक सुराज अभियान के पहले चरण के बाद मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने बिलासपुर में समीक्षा बैठक ली थी। तब बिलासपुर और मुंगेली कलेक्टर ने उनसे बीमा कंपनी के अफसरों की शिकायत करते हुए बताया था कि ये मीटिंग तक में शामिल नहीं होते। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा था कि वे अपने जिलों के कलेक्टर के निरंतर संपर्क में रहे और जल्द से जल्द क्लेम की रकम तय कर इसकी जानकारी कलेक्टरों को दें। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि इस मामले में लापरवाही बरती गई तो कार्रवाई होगी। कलेक्टर पी.दयानंद कई बार बीमा कंपनी के अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं जबकि इसके पहले के कलेक्टर भी लगातार पत्र लिखते रहे हैं। लेकिन कंपनी के अधिकारी न तो समय सीमा बैठक में आते हैं और न ही वे कृषि अधिकारियों के संपर्क में रहते हैं। फसल बीमा को लेकर उप संचालक कृषि आरजी अहिरवार को जिला पंचायत के सदस्यों ने सामान्य सभा में अपने सवालों से घेर लिया था। इधर बीमा क्लेम में हो रही देर को लेकर उप संचालक अहिरवार का कहना है कि वे बीमा कंपनी से कह रहे हैं कि जल्द से जल्द क्लेम बनाने और मूल्यांकन रिपोर्ट कृषि विभाग को देने कहा गया है। उनका कहना है क्लेम बांटने के पहले कृषि विभाग मूल्यांकन रिपोर्ट की पड़ताल करना चाहता है। इधर, बीमा कंपनी के क्षेत्रीय अधिकारी विक्रम मिश्रा के मुताबिक कंपनी के बड़े अधिकारियों के निर्देश पर वे काम करते हैं। इसलिए वे इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं।
62 हजार 550 किसानों ने 6 करोड़ 63 लाख 76 हजार 331 रुपए देकर बीमा कराया है
पिछले साल दिया था मई-जून में: पिछले साल कंपनी ने फसल बीमा की जिला स्तरीय कमेटी को रिपोर्ट दिए बगैर ही किसानों का क्लेम निर्धारित कर उनके बैंक खाता में जमा करवा दिए थे। किसानों से अक्टूबर-नवंबर 2016 में प्रीमियम रकम ली गई और हर्जाना मई-जून 2017 में दिया गया। 54 हजार 293 ऋणी तो 16 हजार 842 अऋणी सहित कुल 71 हजार 135 का बीमा किया गया था। 1 लाख, 9 हजार 734 हेक्टेयर का बीमा हुआ। किसानों से 7.66 करोड़ रुपए लेकर उन्हें क्लेम के तौर पर 6.72 करोड़ रुपए लौटाए गए थे।