बिलासपुर | टिकरापारा गुजराती जैन समाज भवन में मुनिश्री पंथक महाराज का प्रवचन चल रहा है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि जीभ की 2 क्रियाएं रहती हैं, बोलना और खाना खाना। इन दोनों क्रियाओं में धीरज रखना बहुत जरूरी है। क्योंकि जल्दबाजी में विचार किए बगैर कुछ भी बोल दिए तो कभी-कभी अनर्थकारी नुकसान हो सकता है। इतिहास इसका साक्षी है। जो एक बार जबान से निकल गया, उसे वापस भी नहीं खींच सकते और उसका नुकसान भुगतना पड़ता है। उन्होंने प्रवचन में कहा कि आंख का विषय देखना है। हर चीज को देखना तो पड़ता ही है। अल्प दृष्टि और लंबे समय तक गौर से देखते रहना, इसका अलग-अलग परिणाम निकलता है।