गुजराती जैन भवन टिकरापारा में मुनि श्री पंथक महाराज का प्रवचन चल रहा है। शुक्रवार को मुनि श्री ने कहा कि कभी-कभी नटखट स्वभाव के बच्चे जो कि चीटियों का झुंड जो दीवार के ऊपर चढ़ रहा था, उनको रास्ते में बच्चे अपना हाथ रखकर उनकी गति को रोकने की कोशिश करते हैं। तब चीटियां अपना रास्ता बदलकर आगे बढ़ने की कोशिश करती हैं। अगर दूसरा रास्ता भी बंद कर देते हैं, तो तीसरा रास्ता बना लेती हैं। कभी-कभी बच्चे उन चीटियों को हाथ से दबाकर उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, तब भी जब वह हाथ से छूटती हैं तो वापस खड़े होकर उत्साह के साथ आगे बढ़ती हैं। जब तक चीटियां मरती नहीं हैं, तब तक अपना प्रयास चालू रखती हैं। क्योंकि उनके अंदर सिर्फ एक ही मान्यता मैं कर सकूंगी। उन्होंने कहा कि बैलगाड़ी से जुड़े बैल, जिसमें हिसाब से माल सामान भरा है, ऐसी गाड़ी को जब फ्लाईओवर के ऊपर चढ़ना होता है। तब बड़े संघर्ष और कठिनाई के साथ 1.1 इंच आगे बढ़ते हैं। इसी तरह छोटे-छोटे एकदम नाजुक घास के तिनके विपरीत परिस्थितियों में भी और पत्थरों में भी उसमें उगने की कोशिश करते हैं।