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अपोलो में 3 दिन के इलाज का बिल 3.5 लाख आरोप: मृत शरीर को रखे थेे वेंटिलेटर पर

3 वर्ष पहले
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अपोलो एक बार फिर आरोपों के घेरे में आ गया है। इस बार आरोप है कि ज्यादा राशि का बिल बनाने के चक्कर में मृत शरीर को वेंटिलेटर पर रखे रहे। जब परिजन सुरक्षाकर्मियों को धक्का देकर अंदर पहुंचे तो इस बात का पता चला। इसके बाद अपोलो का स्टाफ इलाज करने का नाटक करता रहा। परिजनों ने यह आरोप भी लगाया कि जब से मरीज को भर्ती किया था तभी से ऑपरेशन करने की बात कह रहे थे लेकिन ऑपरेशन हमेशा टालते रहे। यह स्थिति देख मरीज के परिजनों ने अपने अन्य रिश्तेदार व दोस्तों को अपोलो में बुला लिया और गुरुवार-शुक्रवार की रात यहां तालाबंदी कर दी। न किसी को अंदर जाने दिया न ही किसी को बाहर आने दिया। हालांकि अपोलो प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है।

ऐसे कर सकते हैं पता: अगर किसी को भी यह लगता है कि प्राइवेट अस्पताल में मरीज के इलाज के नाम पर धोखा दिया जा रहा है तो वह इस तरह से पता कर सकता है। मरीज अगर वेंटिलेटर पर है तो यहां मल्टी पैरा मॉनीटर भी होता है जिसमें सबकुछ स्वत: ही रिकार्ड होता रहता है। इसमें हृदय गति, ऑक्सीजन की मात्रा तथा ब्लड प्रेशर की रिकार्डिंग होती रहती है। ऐसे किसी भी केस में मल्टी पैरा मॉनीटर की रिकार्डिंग निकालकर जान सकते हैं कि मरीज की मौत कब हुई है।

मृतक अिमत

रिश्तेदार व दोस्तों ने की अस्पताल में तालाबंदी, प्रबंधन ने कहा- आरोप गलत

अमित की मौत के बाद गमगीन परिजन।

वेंटिलेटर पर सब जीरो आ रहा था

राजकिशोर नगर में रहने वाला अमित धर दीवान रिश्ते में मेरी प|ी का भाई है। 13 मई की शाम को पेट में दर्द होने की शिकायत के चलते हमने अपोलो में भर्ती कराया। वहां पहुंचते ही इमरजेंसी में भर्ती कर दिया और दूसरे दिन बताया कि गंभीर हालत है इसलिए ऑपरेशन करना पड़ेगा। तीन दिन ऑपरेशन की बात तो करते रहे पर ऑपरेशन किया नहीं। दो दिन पहले बताया कि हालत बहुत नाजुक है इसलिए डायलिसिस पर रखना होगा, डेढ़ लाख रुपए लगेंगे। हमने कहा जो करना है वह करो बस मरीज ठीक होना चाहिए। लेकिन इस बीच मरीज के पास किसी भी परिजन को जाने नहीं दिया। गुरुवार की शाम 7 बजे जब मामा जी आए तो मैं और वह जबरन गार्ड को पीछे कर इमरजेंसी में घुस गया। यहां जाकर देखा तो जो मशीन लगा रखी थी उसमें हर जगह जीरो ही जीरो आ रहा था। अंदर मौजूद कर्मचारी लापरवाह बने हुए थे। हमने जब कहा कि यह क्या है तो वह हरकत में आए और इलाज करने का नाटक करने लगे। उस दौरान अमित के शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी। बाहर निकलकर हमने यह पूरी बात अन्य रिश्तेदार व परिचितों को बताई तो वह सब भी यहां आ गए। अपोलो के लोग सिर्फ बिल बढ़ाने के लिए ही अमित को दिखावे के लिए वेंटिलेटर पर रखे हुए थे। यह स्थिति देख हमने अस्पताल के गेट पर ताला लगा दिया और न ही किसी को अंदर जाने दिया न ही बाहर आने दिया। इसके बाद अपोलो के सीओओ आए और हमें आश्वासन दिया उसके बाद ही हमने गेट का ताला खोला। तीन दिन का ही बिल 3 लाख 50 हजार रुपए का हो गया था उसके बाद भी डेढ़ लाख रुपए और मांग रहे थे। अपोलो वाले हमें इलाज के नाम पर बेवकूफ बना रहे थे।

शेलू, मृतक अमित धर दीवान के जीजा हैं, उन्होंने जैसा दैनिक भास्कर को बताया

कल ही हो गई थी मौत

मैने इस मामले की जानकारी अपोलो से ली है। मुझे बताया गया है मरीज की मौत गुरुवार को ही हो गई थी। 2 लाख रुपए कम थे इसलिए मृतक के परिजनों ने हंगामा कर दिया। डेड बॉडी तो दे दी गई है। फिर भी अगर लिखित शिकायत आती है तो मामले की जांच कर उचित कार्यवाही की जाएगी। -डाॅ. बीबी बोर्डे, सीएमएचओ

सभी आरोप मिथ्या

मृतक के परिजनों द्वारा जो आरोप लगाए गए हैं वह पूरी तरह से मिथ्या हैं। पूरे इलाज का बिल डेढ़ से पौने दाे लाख रुपए का हुआ है उसे भी अभी भुगतान नहीं किया गया है। डेड बाॅडी रोकी नहीं जा सकती इसलिए उसे दे दिया गया है। जहां तक मरीज की बात है तो उसकी कंडीशन से परिजनों को पहले ही बता दिया गया था कि हालत नाजुक है इसलिए कभी भी कुछ हो सकता है। अस्पताल में ताले डाल दिए गए यह भी पूरी तरह से गलत है। -देवेश गोपाल, पीआरओ, अपोलो

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