खरसिया रेलवे स्टेशन से चोरी गए 70 लाख के जेवर के मामले की हकीकत जानने जयपुर पहुंची टीम को पता चला है कि रिपोर्ट करने वाला सर्राफा का कोई व्यापारी नहीं बल्कि ट्रेडिंग का काम करता है। वह उधार पर मार्केट से जेवरात लेकर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में बेचने का काम करता है और उसे कमीशन के तौर पर पैसे मिलते हैं।
अप्रैल महीने में जयपुर का एक व्यापारी राजेश जैन 70 लाख रुपए के जेवरात लेकर रायपुर पहुंचा था। वहां पर व्यापारियों से सौदा नहीं पटने पर वह साउथ बिहार एक्सप्रेस से रायगढ़ जा रहा था जहां पर उसे अन्य व्यापारियों से डील करनी थी। इसीबीच रास्ते में खरसिया रेलवे स्टेशन में जेवर से भरा बैग किसी ने चोरी कर लिया।
इस मामले में जीआरपी रायगढ़ और आरपीएफ क्राइम ब्रांच को कोई सुराग नहीं मिल पाया। इस पर जीआरपी को चोरी को लेकर संदेह हुआ तो इसका पता लगाने के लिए एक टीम डिविजनल इंस्पेक्टर शिया लहरे के नेतृत्व में जयपुर भेजी गई। इसमें जीआरपी रायगढ़ के इंस्पेक्टर भगत व अन्य शामिल थे। जयपुर पहुंचने पर पता चला कि राजेश जैन की एक छोटी सी दुकान है। वहां ना तो वह व्यापार करता है और ना ही किसी तरह से मैन्युफैक्चरिंग का कोई काम करता है। वह जयपुर मार्केट से बड़े व्यापारियों से क्रेडिट में ज्वेलरी लेता है और उसे अलग-अलग राज्यों के शहरों में जाकर के बेचता है। इसके एवज में उसे कमीशन मिलता है। इस तरह से वह मात्र ट्रेडिंग का काम कर रहा था। 70 लाख के जेवरों के बारे में राजेश ने जो बताया उसके बारे में उन व्यापारियों से भी जीआरपी ने बातचीत की, जिनके यहां से वह जेवर लेकर बेचने के लिए आया था। वापस लौटने के बाद जीआरपी की टीम ने अब नए सिरे से चोरी के मामले की तहकीकात शुरू कर दी है।