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सिम्स में लिक्विड कचरे के निपटान की व्यवस्था जल्द

3 वर्ष पहले
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सिम्स में लिक्विड वेस्ट के डिस्पोजल के लिए नई व्यवस्था शुरू की गई है। मुंबई की संस्था एडवी केमिकल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को यह काम दो साल के लिए दिया गया है।

संस्था ही यहां से कचरा उठाएगी और इसका उपयोग रिसर्च के लिए करेगी। अभी तक सिम्स में लिक्विड वेस्ट का डिस्पोजल सोडियम हाइपो क्लोराइड से किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने प्रयोग के तौर पर मुंबई की एडवी कंपनी को प्रदेश के सभी मेडिकल काॅलेजों की लिक्विड वेस्ट के डिस्पोजल का काम दो साल के लिए दिया है। कंपनी सभी सरकारी मेडिकल काॅलेज के अलावा इनसे संबंध अस्पताल के विभिन्न वार्डों, विभागों, ओपीडी, आॅपरेशन थियेटर व पैथॉलाजी लैब से निकलने वाले लिक्विड बाॅयोमेडिकल वेस्ट को एकत्रित करेगी। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अवर सचिव केके मोटवानी ने इस बात की जानकारी मेडिकल काॅलेज के संचालक को भेजी है। संचालकों ने इसे डीन को भेजा है। सिम्स में अभी तक साॅलिड वेस्ट का काम इन्वायरो केयर इंटरनेशनल एजेंसी को दिया हुआ है। सिम्स में रोज साॅलिड वेस्ट करीब 80 से 100 किलोग्राम निकलता है। सिम्स के एमएस रमणेश मूर्ति ने नई व्यवस्था को विसंक्रमण की दिशा में एक सार्थक एवं महती कदम बताया है।

यह रखी गई है शर्त

मुंबई की संस्था एडवी संबंधित अस्पतालों को कंटेनर व बैग उपलब्ध कराएगी तथा प्रति यूनिट कंटेनर का 10 रुपए भी देगी। यह राशि अस्पतालों के स्वशासी कोष में जमा होगा। संस्था यह काम जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के प्रावधानों के अंतर्गत व फ्लूड, सैंपल, ब्लड बैग का उपयोग केवल चिकित्सा अनुसंधान के लिए ही करेगी।

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