आग लगी तो जलकर खाक हो जाएंगे वाहन
दोपहिया स्टैंड में आग से बचाव के लिए नहीं है पर्याप्त इंतजाम।
परिवहन रिपोर्टर | बिलासपुर
करोड़ों रुपए का पार्किंग ठेका और सुरक्षा नाम मात्र की नहीं। रेलवे ने वाहन पार्किंग में सुरक्षा के ठोस उपाय नहीं किए हैं। ठेकेदार ने सुरक्षा के जो इंतजाम कर रखे हैं वे काफी नहीं है। हादसा कब और किस सूरत में हो जाए यह कह पाना कठिन है। अभी हालात ऐसे हैं कि आग लग जाए तो पानी के लिए कुआं खोदने जैसे हालात पैदा हो जाएंगे।
बिलासपुर रेलवे स्टेशन में 6 अलग-अलग पार्किंग हैं। इनमें से तीन पार्किंग दो पहिया वाहनों के लिए, एक ऑटो स्टैंड और दो कार पार्किंग है। सभी प्रकार के वाहनों को मिलाकर प्रतिदिन 2000 के लगभग वाहन पार्किंग में खड़े किए जाते हैं। तीन वर्ष के लिए यह ठेका लगभग 6 करोड़ रुपए में दिया गया है। तेज गर्मी पड़ने लगी है। किसी भी स्टैंड में शेड नहीं है। खुले में घंटों खड़े रहने वाले लगभग सभी वाहन पेट्रोल से संचालित होते हैं। अब अगर दो पहिया वाहनों में एक वाहन में औसतन दो लीटर यानि 3600 लीटर पेट्रोल एवं 100 से अधिक चार पहिया वाहनों में 10 लीटर के हिसाब से एक हजार लीटर पेट्रोल भरा रहता है। ऑटो भी पेट्रोल से ही संचालित होते हैं उसे भी एक हजार लीटर मान लिया जाए तो प्रतिदिन रेलवे स्टेशन के सामने अलग-अलग पार्किंग में 5 हजार लीटर से अधिक ज्वलनशील पदार्थ एक समय में मौजूद रहता है। तपती दोपहरी में अगर धोखे से भी किसी एक स्थान पर चिंगारी लग गई तो उसे भड़कने में चंद मिनट से ज्यादा नहीं लगेगा। लेकिन इसकी परवाह किसी को नहीं है। तेज गर्मी पड़ने के साथ ही पेड़ों के सूखे पत्तों के ढेर पार्किंग स्थलों के आसपास दिखाई दे रहे है। ठेकेदार इसकी सफाई करा रहा है लेकिन आग से बचाव के लिए उनकी तैयारी माकूल नहीं है। उनके पास 10 छोटे फायर इंस्टिंग्यूशर और हर पार्किंग में चार-पांच रेत की बाल्टियां रखी हुई हैं। तेज गर्मी में जब आग भड़केगी तो यह कितना कारगर होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
हजारों लीटर ज्वलनशील
पदार्थ, पर्याप्त पानी नहीं
पार्किंग में खड़ी गाड़ियों में पांच हजार लीटर से अधिक पेट्रोल एक समय में रहता है। लेकिन इसकी सुरक्षा के लिए रेलवे प्रशासन ने 5 हजार लीटर पानी की भी व्यवस्था नहीं की है। पार्किंग में दो स्थान पर हाफ इंच पाइप लाइन का कनेक्शन लगाकर उसमें पानी सप्लाई दी जा रही है। इसमें पानी का जितना फोर्स है उससे एक बाल्टी पानी भरने में पांच मिनट से अधिक लगता है। अगर आगजनी हुई तो इन नलों से पानी भरना भी मुश्किल हो जाएगा। दो इंच पानी का पाइप लाइन देने की मांग पार्किंग ठेकेदार पिछले साल से कर रहा है लेकिन सालभर बीतने के बाद भी रेलवे प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा।
फायर ब्रिगेड के लिए पुलिस लिख चुकी पत्र
रेलवे प्रशासन के पास अपना फायर ब्रिगेड नहीं है। तोरवा पुलिस थाने से रेलवे प्रशासन को कई बार पत्र लिखकर फायर ब्रिगेड रेलवे स्टेशन में रखने कहा गया है लेकिन रेलवे प्रशासन इस मामले में गंभीर नहीं है। पहले भी रेलवे प्रशासन यह कह चुका है कि उसकी आवश्यकता नगर निगम के फायर ब्रिगेड से पूरी हो जाएगी।