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गुड़ाखू पर प्रतिबंध की मांग, जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई बढ़ी

3 वर्ष पहले
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पिछली सुनवाई में निर्माता कंपनियों को जारी किया गया था नोटिस

छत्तीसगढ़ में 10 हजार करोड़ से भी अधिक के गुड़ाखू का अवैध कारोबार चल रहा

लीगल रिपोर्टर | बिलासपुर

प्रदेश में गुड़ाखू पर प्रतिबंध की मांग करते हुए लगाई गई जनहित याचिका पर सुनवाई बढ़ गई है। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने गुड़ाखू बनाने वाली कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

प्रदेश में करीब 10 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा का गुड़ाखू का अवैध कारोबार चल रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग गुड़ाखू के आदी होते हैं। रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला और अभिषेक प्रताप सिंह ने जनहित याचिका पेश कर कहा है कि गुड़ाखू बनाने के लिए कोई अनुमति या लाइसेंस भी नहीं ली जाती, जबकि प्रोटेक्शन ऑफ फूड सिक्यूरिटी एक्ट 2006 के तहत ऐसे उत्पादों के लिए लाइसेंस अनिवार्य है, लेकिन प्रदेश में इसका पालन नहीं किया जा रहा। खाद्य और औषधि विभाग द्वारा भी इस कारोबार के लिए अनुमति नहीं दी गई है। गुड़ाखू के उपयोग करने से हजारों लोग कैंसर और दूसरी जानलेवा बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। कई लोगों की जान भी चली गई है। विभाग के अधिकारियों को यह भी नहीं पता कि गुड़ाखू बनाने में किस सामान का उपयोग किया जाता है।

याचिका के साथ कोलकाता की एक लैब रिपोर्ट पेश की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक गुड़ाखू में आर्सेनिक होने की जानकारी सामने आई है। यह एक तरह का जहर है, जो सड़े हुई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सभी गुड़ाखू कंपनियों को नोटिस जारी किया था। मामले पर मंगलवार को सुनवाई होनी थी, इस पर सुनवाई बढ़ा दी गई है।

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