कमेटी ने कुलपति से कहा-मशीन चलाने कर्मचारी ही नहीं, पद भरें
एजुकेशन रिपोर्टर | बिलासपुर
सेंट्रल यूनिवर्सिटी में शोध के लिए महामशीन लगाई गई है। महामशीन लगने के बाद अभी तक इसमें शोध नहीं हो रहे हैं, क्योंकि यूनिवर्सिटी ने मशीन चालने के लिए उपयोगी यंत्रों को अभी तक खरीद नहीं पाई है। इसके अलावा इस चलाने के लिए तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती होनी थी, वह भी अभी नहीं हुआ है। इसके कारण परमाणु ऊर्जा विभाग इसे चालने पर रोक लगाई है। इसके अलावा यंत्रों को खरीदने 2 करोड़ रुपए भी यूनिवर्सिटी को मिले थे। उसका भी उपयोग यूनिवर्सिटी नहीं कर पाई। जब उसे ब्यॉज सहित वापस देने यूनिवर्सिटी से मांग किए तो वहां के कमेटी के सदस्यों को निरीक्षण करने का समय यूनिवर्सिटी उन्हें दी है। वहीं अब यूनिवर्सिटी उनसे मार्च 2021 तक का मौका मांग रही है। वहीं दूसरे दिन कमेटी के सदस्यों ने कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता से कहा कि मशीन चलाने कर्मचारी ही नहीं है, उनके पद को भर लिया जाए।
परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के अधीन बोर्ड ऑफ न्यूक्लियर साइंसेस द्वारा वित्त पोषित मेगा प्रोजेक्ट के अंतर्गत राष्ट्रीय त्वरक आधारित शोध केंद्र (एक्सीलेरेटर सेंटर) में चल रही गतिविधियों का आंकलन करने और इस कार्यक्रम की अवधि को आगे बढ़ाने के लिए गठित प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कमेटी का पांच सदस्यीय दल दूसरे दिन भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एक्सीलेरेटर की जांच की। मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्यों ने कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता से परियोजना के सुचारू संचालन में संपूर्ण सहयोग प्रदान करने कहा। उन्होंने कहा कि परियोजना पूर्ण होने के लिए बीआरएनएस पूरी तरह सहयोग कर रहा है। कमेटी के सदस्यों ने प्रो. गुप्ता से कह कि अभी तक केंद्र में तकनीकी कर्मचारी तक नहीं हैं। उनके रिक्त पदों को भरा जाए। समिति द्वारा जल्द से जल्द परमाणु नियामक बोर्ड से मशीन चलाने की अंतिम अनुमति प्राप्त कर केन्द्र की सुविधाओं का उपयोग वैज्ञानिक समुदाय को प्रदाय किये जाने पर बल दिया।