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बिलासपुर में हर अहम दफ्तर पहले माले पर, दिव्यांगों के रैंप के लिए मिले 7 करोड़, फिर भी सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ने को हैं मजबूर

3 वर्ष पहले
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बिलासपुर में नई कंपोजिट बिल्डिंग हो या पुरानी। जिला पंचायत हो या नगर निगम। जिला शिक्षा विभाग हो या कोई और महत्वपूर्ण दफ्तर। ये सारे विभाग पहले या दूसरे माले पर स्थित हैं। यहां सीढ़ियों पर चढ़ने उतरने और आने-जाने में सबसे ज्यादा तकलीफ उन दिव्यांगों को होती है, जिनके लिए सरकार ने सुगम्य भारत योजना के तहत सात करोड़ मंजूर किए हैं। मंशा है हर सरकारी भवनों में रैंप बनाने की। ताकि किसी भी दिव्यांग को किसी भी तरह से कोई परेशानी नहीं हो। इसके बावजूद अधिकारी रैंप निर्माण पर गंभीरता नहीं बरते रहे हैं। इसके चलते हजारों दिव्यांगों को तकलीफ झेलनी पड़ रही है।

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इसका पूरा मामला रायपुर से अटका पड़ा है। तमाम सरकारी विभागों और शैक्षणिक संस्थानों में रैंप बनाने के लिए प्रस्ताव बनाया गया है। जिसे राज्य सरकार को भेजा गया और उस प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी भी दे दी है। विभाग को 6 करोड़ 88 रुपए स्वीकृत किया गया है, लेकिन पांच महीने के बाद भी दिव्यांगों के लिए रैंप निर्माण शुरु नहीं किया जा सका है। यही वजह है कि परेशानी बरकरार है। यहां सबसे ज्यादा परेशानी छात्र और उन जरूरतमंदों को होती है जो हर दिन सरकारी विभागों को चक्कर लगाते हैं। कलेक्टारेट के तमाम दफ्तरों के अलावा तहसील कार्यालय, रजिस्ट्री दफ्तर में दिव्यांगों को परेशान होते देखा जा सकता है। इनमें कुछ खुद सरकारी कर्मचारी हैं, जो रोजाना ड्यूटी आते हैं। पूछने पर वे अपना दर्द बयां करते हैं। कहते हैं सरकार ने सारी सहूलियत दे रखी है, पर अधिकारियों की उदासीनता के चलते काम अटके हुए हैं। उन्हें हर दिन कई तरह के कामों के सिलसिले में सरकारी दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ता है। इसके बावजूद उनकी सुविधाओं को लेकर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। उनके मुताबिक मामले में बड़े अधिकारियों को संज्ञान लेना होगा तभी उनकी सुविधाओं पर अधिकारी ध्यान देेंगे। नहीं हो तो ऐसी परेशानी झेलना आम बात रहेगी। इसलिए सरकारी अफसरों को मामले में गंभीरता बरतनी होगी।

अफसर कहते हैं प्रस्ताव मंजूर, पर बजट अभी नहीं भेजा गया है यहां

नई कंपोजिट बिल्डिंग में 20 दफ्तर, भीषण गर्मी के बाद नहीं सुधरी लिफ्ट

कुछ साल पहले करोड़ों की लागत से बनी नई कंपोजिट बिल्डिंग में सुविधाओं को लेकर जनता दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यहां लगाई गई लिफ्ट महीनों से बंद पड़ी है। गर्मी करीब और पेयजल भी बड़ी समस्या बनकर उभरी है, जिसकी ओर मेंटनेंस करने वाले अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे है। यही वजह है कि यहां दिक्कत बरकरार है। विभिन्न सरकारी दफ्तरों को समेटकर रखने वाले भवनों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए करोड़ों की लागत से नई कम्पोजिट बिल्डिंग तैयार की गई है। पर अब भी इस बिल्डिंग में कई बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त नहीं हो पाई हैं। इसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। न तो भवन में अब तक लिफ्ट की सुविधा व्यवस्था हुई और न पेयजल की किल्लत दूर हो रही है। सबसे अधिक परेशानी दूसरे और तीसरे माले पर काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को हाेती है। वर्तमान में यहां श्रम विभाग, खाद्य एवं औषधि विभाग, जिला परियोजना दफ्तर, डीआईसी, समेत अन्य सरकारी दफ्तर हैं। यहां आम लोगों को सीढि़यां चढ़ने उतरने में परेशानी होती है। दिव्यांग तो इससे ज्यादा परेशानी उठाते हैं।

नई कंपोजिट बिल्डिंग में ऐसा नजारा आम है। लिफ्ट बंद से ये परेशानी है।

पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग से सुविधाएं दूर

पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग में हर जगह परेशानी है। स्कूल शिक्षा विभाग का दफ्तर पहले माले पर है। यहां ही सबसे ज्यादा लोग आते जाते हैं। यहां दोनों छोर पर दिव्यांगों के लिए रैंप की व्यवस्था नहीं हुई है। नीचे से ऊपर जाने के लिए परिजनों का सहारा ही उनके लिए रैंप का काम करता है। कई बार स्थिति ऐसी बन जाता है कि परिजन भी उन्हें ऊपर ले जाने से कतराते हैं। इसके कारण उनका सरकारी काम टल जाता है। सरकारी स्कूलों में छात्रवृत्ति और कई योजनाओं की समस्या का निराकरण यहां से किया जाता है। इसलिए उन्हें आना जाना पड़ता है। कई शिकायतों के बाद यहां ये सहूलियत नहीं मिली। इसके अलावा यहां बाथरुम भी गंदा पड़ा है। इसलिए दिक्कत बरकरार है।

सरकारी भवनों में ऐसे बनेंगे रैंप

जितने फ्लोर, उतने दूर तक रैंप

शहर के सरकारी समेत तमाम भवनों में रैंप निर्माण के लिए मंजूरी दी गई है। वहां पर जितने फ्लोर है, वहां तक रैंप का निर्माण किया जाएगा। यानि उसमें ट्रायसायकिल के जरिए भी दिव्यांग पहुंच सकेंगे। ग्राउंड फ्लोर से लेकर टॉप फ्लोर तक रैंलिंग लगाए जाएंगे। यानी रैंप के दोनों तरफ रेलिंग होगी। अभी तक प्रदेश के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल और जिला अस्पताल में रैंप की सुविधा है।

सरकारी रिकॉर्ड में डेढ़ लाख है संख्या

बिलासपुर संभाग में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक नि: शक्त लोगों की संख्या डेढ़ लाख के करीब है। हर स्थानों पर ये प्रोजेक्ट इन्हीं की परेशानी को देखकर तैयार किया गया है। इसके बाद उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है। रायपुर में लोक निर्माण विभाग को रैंप बनवाने राशि जारी करने के बाद इसमें किसी प्रकार का फॉलोअप लेने के लिए जिम्मेदार अधिकारी रूचि नहीं ले रहे हैं।

अभी कोई सूचना नहीं, जल्द बनाएंगे

समाज कल्याण विभाग को बिलासपुर के लिए अभी बजट नहीं मिला है। इसके कारण रैंप बनाने की योजना अटकी हुई है। जैसे ही ये पैसे मिलेंगे हम काम शुरू कराएंगे। इसके पैसे कब तक मिलेंगे ये जानकारी में नहीं है। धरमन खलखो, संयुक्त संचालक, समाज कल्याण विभाग, बिलासपुर

नई और पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग, जिला पंचायत दफ्तर, नगर निगम सहित कई दफ्तरों में परेशानी

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