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खेल परिसर में बनने हैं फुटबाल, वॉलीबाल और कई मैदान, तीन साल पहले छह करोड़ मंजूर, फिर भी टूटे नेट में प्रैक्टिस को खिलाड़ी लाचार

3 वर्ष पहले
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आशीष दुबे | बिलासपुर 99079-01010

सरकंडा स्थित जिला खेल परिसर में फुटबाल ग्राउंड और वॉलीबाल मैदान सहित कई सुविधाओं की फाइल फिलहाल ठंडी पड़ी है। यहां मैदान के जीर्णोद्धार और दूसरे कामों के लिए तीन साल पहले प्रोजेक्ट तैयार किया गया। इसमें जिला प्रशासन को चार करोड़ रुपए और एसईसीएल को दो करोड़ रुपए खर्च करने की बात थी। तत्कालीन कलेक्टर ने एसईसीएल को सीएसआर मद से पैसे देने के लिए पत्राचार किया। एसईसीएल के अफसरों ने इसके लिए जिला प्रशासन से मैदान से जुड़ी तमाम औपचारिकताएं पूरी करने की बात कही। प्रशासन ने खेल अधिकारियों से मिलकर औपचारिकताओं को पूरा कर इसे एसईसीएल को भेज दिया। इसके बाद भी सबकुछ यथावत है। अधिकारियों के पूछने पर एसईसीएल के अधिकारी जवाब देते हैं कि यह प्रकरण उन्होंने अपनी बोर्ड के समक्ष रख दिया है। जैसे ही सबकुछ वहां से आेके होगा काम बढ़ाएंगे। इसके चलते सालों से यहां प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ियों को दिक्कत हो रही है।

दैनिक भास्कर ने लाेगों से मिली शिकायत के बाद जिला खेल परिसर का जायजा लिया। साल दर साल अनदेखी के चलते यहां की हालत खराब होती जा रही है। क्रिकेट के खिलाफ फटे हुए नेट में इसकी प्रैक्टिकस कर रहे हैं। एकलौते नेट के चलते बाकी खिलाड़ी खुले मैदान में ही इसका अभ्यास करते मिले। नाम नहीं छापने की शर्त पर उन्होंने अपनी पीड़ा बताई। कहा मैदान में कोई भी कभी भी घुस आता है। इनमें क्या शराबी और क्या आम लोग। इसके अलावा शाम ढलते ही यहां असाजिक तत्वों का डेरा आम बात हो चुकी है। खिलाड़ियों से हुज्जबाती और दूसरी घटनाएं भी आम हैं। इससे पहले इस बात की शिकायत खेल परिसर के ठीक सामने सरकंडा थाने में हो चुकी है। बांउड्रीवॉल नहीं होने के चलते यहां यह समस्याएं उपजीं। और अभी भी छह फिट की दीवारों से लांघकर लोग खेल परिसर में घुसकर नशाखोरी और गलत काम को अंजाम दे रहे हैं। इसके चलते ही खिलाड़ियों को तकलीफ उठानी पड़ रही है। ऐसा बरसों से जारी है। इन्हीं दिक्कतों को दूर करने और खेल को बढ़ावा देने की मंशा से दो करोड़ 43 लाख रुपए की लागत से कई तरह के विकास काम करने के लिए एसईसीएल को पत्राचार किया। प्रशासन की औपचारिकताओं के बाद यह मामला जस का तस पड़ा है।

मैदान के बीच कोई साइकिल चल रहा कोई लगा रहा, इसलिए परेशानी, अफसर कह रहे-फाइल देखेंगे

दो स्टीमेट में प्रस्ताव

4 करोड़ खनिज और दो करोड़ 43 लाख एसईसीएल से लेने चला पत्र

कलेक्टर ने एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर इस संबंध में बताया है। उन्होंने कहा कि चूंकि पूर्व में सीएसआर मद से जिला खेल परिसर में एस्ट्रोटर्फ प्रस्तावित था लेकिन अब राज्य स्तरीय खेल प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में इसका निर्माण राज्य सरकार के मद से हो रहा है। सीएसआर फंड का उपयोग करने के लिए पीडब्ल्यूडी संभाग-2 को इस्टीमेट बनाने कहा गया था। शुरुआती तौर पर इस्टीमेट बनाया गया है। इसमें कुल 6 करोड़ 69 लाख रुपए खर्च होना प्रस्तावित है। इसमें 4 करोड़ 44 लाख रुपए खनिज न्यास निधि तो 2 करोड़ 25 लाख रुपए एसईसीएल के सीएसआर मद से खर्च करने का निर्णय लिया गया है।

20 अगस्त को फाइल तैयार

खेल से जुड़ी इन सुविधाओं से वंचित हुए खिलाड़ी

20 अगस्त 2016 को जिला खेल परिसर के जीर्णोद्धार और उन्नयन का रास्ता साफ हो गया है। कलेक्टर ने एसईसीएल के सीएमडी को पत्र लिखकर 2.25 करोड़ रुपए स्वीकृत करने को कहा है। जीर्णोद्धार व निर्माण कार्य के लिए 4.44 करोड़ रुपए खनिज न्यास निधि से खर्च करने की बात लिखी गई। खेल परिसर के लिए 6.69 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया। एसईसीएल मुख्यालय के सामने जिला खेल परिसर की स्थापना के बावजूद वहां अभी तक कई निर्माण कार्य नहीं हो सके। बॉस्केट बॉल के कोर्ट, कबड्‌डी, बैडमिंटन और अन्य खेलों के लिए सुविधाएं नहीं है। जो सुविधाएं वहां दी गई, वे भी देखरेख के अभाव में खराब होती चली गई। पूर्व कलेक्टर ठाकुर राम सिंह के कार्यकाल में जिला खेल परिसर का जीर्णोद्धार व हॉकी को बढ़ावा देने के मकसद से राजनांदगांव की तरह ही यहां भी एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाने की योजना बनाई गई थी।

मैंने भी सुना है, फाइल नहीं देखी है, आज देखती हूं

जिला खेल परिसर के उन्नयन की फाइल मैंने देखी नहीं है। पूर्व में जरूर यह बात संज्ञान में आई थी। ऐसा है तो मैं दिखवा लेती हूं। वैसे इसकी ज्यादा जानकारी खनिज विभाग से ही मिल सकती है। अभी तक इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई, इसलिए ज्यादा कुछ पता नहीं है। आज इसकी फाइल दिखवा लेती हूं। - फरिहाआलम सिद्दीकी, सीईओ, जिला पंचायत

जिला खेल परिसर में क्रिकेट का एकलौता नेट। इसमें ही खिलाड़ी लाचारीवश प्रैक्टिस करते देखे जा सकते हैं।

ऐसे बढ़ाया गया मामला, औपचारिकताएं भी पूरी

तत्कालीन कलेक्टर ठाकुर राम सिंह ने एसईसीएल के सीएसआर मद से एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाए जाने की अनुशंसा कर अधिकारियों को भेजी जिसे स्वीकार भी कर लिया गया। लेकिन उनके तबादले के बाद प्रशासन और एसईसीएल के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। फिर कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के समय भी इस संबंध में चर्चा हुई लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद संभागायुक्त सोनमणि बोरा खेल संचालक बने तो उन्होंने कलेक्टर के साथ राज्य खेल परिसर व जिला खेल परिसर में रुके हुए निर्माण कार्यों की समीक्षा की और प्रपोजल बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने बास्केट बॉल के कोर्ट, कबड्‌डी ग्राउंड, मल्टीपरपज ग्राउंड, बाउंड्रीवाल सहित अन्य जीर्णोद्धार व निर्माण कार्य का प्रपोजल व इस्टीमेट पीडब्ल्यूडी से तैयार करवाया। इसके बाद से तत्कालीन कलेक्टर अंबलंगन के बाद अब कलेक्टर पी दयानंद मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अभी हालात यथावत हैं।

चार कलेक्टर ने लगाया जोर

जिला प्रशासन और खेल अफसरों ने ये बनाया है प्रस्ताव, अभी कुछ भी नहीं

आठ दुकानें, दो गार्ड रूम - 25.50 लाख

कांक्रीट स्टेप्स - 8.31 लाख

बास्केट बाल कोर्ट (तीन) - 32.40 लाख

फुटबाल ग्राउंड - 59.07 लाख

कबड्‌डी ग्राउंड - 19.66 लाख

वॉलीबाल ग्राउंड - 12.76 लाख

किड्स स्वीमिंग पुल - 2 लाख

सीसी रोड - 51.57 लाख

हॉस्टल - 13.44 लाख

बाउंड्रीवाल - 16 लाख

इंडोर हाल अपग्रेडेशन - 35 लाख

इलेक्ट्रिक वर्क - 77.35 लाख

वाटर सप्लाई, ट्यूबवेल - 41.25 लाख

बोर्ड के समक्ष रखा है मामला

जिला खेल परिसर के जीर्णोद्धार के लिए एसईसीएल से दो करोड़ 43 लाख रुपए मांगे गए थे। अभी उन्होंने अपनी बोर्ड के समझ मामले को रखा है। पैसा सेंक्शन हुआ है या नहीं इस बात पर संशय की स्थिति है। - ए. एक्का, तत्कालीन खेल अधिकारी बिलासपुर

मैदान को संवारना पहली प्राथमिकता

मैंने अभी हालिया दिनों में ही अपनी ज्वानिंग दी है। इसलिए बजट और टेंडर के बारे में पता नहीं है। हां, पर खेल मैदान का उन्नयन होना बहुत जरूरी है। यह हमारी पहली प्राथमिकता में शुमार है। अभी स्थिति अच्छी नहीं है। चाहे जब कोई भी मैदान के भीतर घुस जाता है। हमें इसे आदर्श मैदान के रूप में विकसित करना है। - प्रतिमा सागर, खेल अधिकारी, बिलासपुर

जिला पंचायत सीईओ से पूछिए

मुझे तो इसकी जानकारी नहीं है। यदि खनिज न्यास से बजट की बात है तो इसकी जानकारी जिला पंचायत सीईओ दे सकती हैं। आप उनसे ही मामले में बात कर लीजिए। - बीएस उइके, अपर कलेक्टर, बिलासपुर

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