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यात्री को डाॅक्टर की जरूरत पर टीटीई कर रहे लापरवाही

3 वर्ष पहले
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ट्रेन में अगर कोई बीमार पड़ता है तो उस ट्रेन में सफर कर रहे डाॅक्टर की मदद ली जा सकती है। रेलवे ने ऐसा नियम बना रखा है। इसलिए रिजर्वेशन फार्म में ही डाॅक्टरों से उनका पेशा अंकित करा लिया जाता है। हालांकि जोनल से गुजरने वाली ट्रेनों में अब तक सफर के दौरान किसी डाॅक्टर ने मरीज की मदद नहीं की। न ही टीटीई स्टाफ ने ट्रेनों में डाक्टरों को तलाशने की जहमत उठाई।

डाक्टरों का पेशा अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। इस महत्व को रेलवे भी अच्छी तरह से समझती है। इसलिए रिजर्वेशन फार्म में ही एक कालम डाक्टरों के लिए है। फार्म भरते समय डाक्टरों को उस पर अंकित कर बताना होता है। ऐसा इसलिए है ताकि ट्रेन में आवश्यकता पड़ने पर डाॅक्टर की मदद ली जा सके। इस नियम को टीटीई को फॉलो करना है लेकिन जैसे ही टीटीई के पास कोई यात्री मेडिकल मदद के लिए पहुंचता है तो वह तत्काल कंट्रोल को खबर देकर अगले स्टेशन में डाॅक्टर की व्यवस्था करने कहता है। हाल ही में ट्रेन में सफर के दौरान बीमार पड़ने वाले तीन लोगों की मौत इलाज नहीं मिलने की वजह से हो चुकी है। यह गंभीर मामला है क्योंकि हर ट्रेन में डाॅक्टर व स्टाफ भेज पाना रेलवे के लिए संभव नहीं है। ऐसे में रेलवे ने निर्णय लिया था कि 1000 से 1200 यात्रियों को लेकर चलने वाली ट्रेन में एक डाॅक्टर तो होता ही है।

ऐसे हो सकती है तलाश

जिस ट्रेन में कोई यात्री बीमार पड़े और टीटीई तक खबर पहुंचे तो सबसे पहले टीटीई को चाहिए कि वह और उसके साथी ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट चेक करे। अगर उसमें कोई डाॅक्टर उपलब्ध हो तो सबसे पहले उससे जाकर मदद की गुजारिश करे। अगर डाॅक्टर मना कर दें तो आगामी स्टेशन के लिए डाॅक्टर व उनकी टीम के लिए कंट्रोल को सूचित करे, लेकिन अभी टीटीई ऐसा नहीं करते। वे सीधे कंट्रोल रूम काे सूचना देकर पीड़ित यात्री को सांत्वना देकर चले जाते हैं।

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