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शहर के विभिन्न जगहों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होंगे अनेक कार्यक्रम

3 वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़ का सीजन का पहला त्योहार हरेली अमावस पुष्य नक्षत्र में 11 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन के अमावस्या के दिन मनाए जाने वाले इस लोक पर्व पर किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करेंगे। साथ ही लोग अपने घरों में नीम की पत्तियां लगाएंगे और अपने कुल देवता की पूजा कर उन्हें दही व जनेऊ अर्पित करेंगे। प्रसाद के रूप में खीर व चीला बांटेंगे। इस अवसर पर बच्चे से लेकर युवा तक गेंड़ी चढ़ते हैं। वहीं गेंड़ी और नारियल फेंकने की प्रतिस्पर्धा भी होती है।

हरेली छत्तीसगढ़ का लोक पर्व है। सावन की अमावस्या को मनाया जाने वाला पर्व हरेली इस वर्ष 11 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन किसान नांगर, गैती, कुदाली, फावड़ा समेत कृषि के काम आने वाले हर तरह के औजारों की साफ-सफाई कर उनकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। इस पर्व पर गेंड़ी का बहुत महत्व है। सावन की अमावस को मनाए जाने वाले इस त्योहार के दिन ही प्रत्येक घर में गेंड़ी का निर्माण किया जाता है। गेंड़ी पुरुष खेल है। घर में जितने युवा व बच्चे होते हैं उतनी ही गेड़ी बनाई जाती है। हरेली के दिन से प्रारंभ गेड़ी का, भादों में तीजा पोला के समय समापन होता है। बच्चे तालाब जाते हैं, स्नान करते समय गेड़ी को तालाब में छोड़ आते हैं। फिर वर्ष भर गेड़ी नहीं चढ़ते। कई स्थानों पर नारियल फेंक प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा। इस त्योहार की युवा व किसान सालभर से प्रतीक्षा करते हैं।

छत्तीसगढ़ का सीजन का पहला त्योहार हरेली मनेगा 11 अगस्त को, बच्चे व युवा गेंड़ी चढ़ेंगे, नारियल फेंक प्रतियोगिता होगी

बारिश और गेंड़ी का संबंध

गेड़ी के पीछे एक महत्वपूर्ण पक्ष है कि इसका प्रचलन वर्षा ऋतु में होता है। बारिश से कई स्थानों पर इतना अधिक कीचड़ होता है कि आते-जाते पैर के घुटने भी डूब जातें हैं। इस समय बच्चे गेड़ी पर चढ़कर एक स्थान से दूसरे स्थान आते-जाते हैं। उनमें कीचड़ लग जाने का भय नहीं होता। गेड़ी के सहारे कहीं से भी हो आगे बढ़ जाते हैं। कीचड़ में चलने पर ही गेड़ी का आनंद आता है और सार्थक सा लगता है। यही स्पर्धा बन जाती है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बच्चों व युवाओं ने तैयारी करना शुरू कर दिया है। स्पर्धा के विजेताओं को पुरस्कार से सम्मानित किया जाता हैं।

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