पहले टेंडर निकालने में की गड़बड़ी, और अब सात माह में उखड़ने लगा डेढ़ करोड़ का भवन
जल संसाधन विभाग परिसर में प्रार्थना भवन की दीवारें उधड़ने लगी हैं। सात महीना बाद ही गुणवत्ताहीन काम की झलक दिखने लगी है। डेढ़ करोड़ की राशि से बने प्रार्थना भवन को कर्मचारियों के अनुशासन सिखाने के नाम पर बनाया गया था। भवन में अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट की 71.79 लाख राशि उपयोग में लाई गई है।
पूर्व मुख्य सचिव गणेश शंकर मिश्रा ने जल संसाधन परिसर में प्रार्थना भवन का उद्घाटन किया था। पहले तो कर्मचारियों के अनुशासन सिखाने का हवाला दिया गया लेकिन बाद मे अफसरों ने बड़े लेवल पर मीटिंग करने का कारण बता दिया। भवन बनाने में सबसे बड़ा पेंच बिल्डिंग बनने के बाद टेंडर जारी करना था। इस मामले में अब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई। बगैर टेंडर के बनवाए गए डेढ़ करोड़ के इस भवन में अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट मद 71.79 लाख की राशि का उपयोग भी कर लिया गया । यही नहीं जब बिल्डिंग बन गई तब 6.71 लाख रुपए की रााशि का उपयोग एसीपी व ग्रेनाइट लगाने और 9.02 लाख राशि का उपयोग वाल फेसिंग फ्रेम के लिए टेंडर जारी कर दिया गया जबकि काम पहले ही हो चुका था। जब मामले का खुलासा हो गया तो एक टेंडर निरस्त कर दिया जबकि दूसरे टेंडर होने के एक माह बाद भी काम शुरू नहीं हो सका। अब तक कांफ्रेंस हाल में 71.79 लाख राशि का उपयोग अरपा भैंसाझार मद से किया गया है। इस मामले में जांच कर दोषी अफसरों पर कार्रवाई की बात अफसरों से लेकर विभागीय मंत्री ने तक कही थी, पर तक कुछ नहीं हुआ। इसलिए मामले में कई सवाल हैं।
एग्रीमेंट होने के एक माह बाद भी जारी नहीं हुआ है 9.71 लाख का काम
जल संसाधन विभाग स्थित प्रार्थना भवन। यहां निर्माण के कुछ महीने बाद दीवारों पर दरारों का दौर शुरू हो गया है। इसलिए इसकी गुणवत्ता पर सवाल हैं।
बेरोजगार इंजीनियर को किया दरकिनार, ऐसे खोले टेंडर
पहला टेंडर निविदा सूचना क्रमांक 15 था जो 20 सितंबर 2017 को जारी किया गया था। टेंडर में जल संसाधन परिसर स्थिति कांफ्रेंस हाल में 6.71 लाख की राशि से एसीपी व ग्रेनाइट लगाने का काम था। यह काम बेरोजगार इंजीनियरों के माध्यम से होना था। इसे बाद में निरस्त कर दिया गया।
अरपा भैंसाझार के पैसे से भवन बनाने का पहला मामला
जल संसाधन विभाग स्थित इस भवन को अरपा भैंसाझार परियोजना के मद से बनवाया गया है। यह अपनी तरह का पहला मामला है, जिसमें सरकारी अफसरों ने कई तरह की लापरवाही बरती है। इसके बावजूद अभी तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है। खुद मंत्री ने मामले में संज्ञान लेकर जांच की बात कही। इसके अलावा पूरे मामले में गंभीरता बरतने का आश्वासन दिया। इसके उलट अभी तक सबकुछ यूं ही चल रहा है। पूछने पर अधिकारी अब बोलने से बच रहे हैं। वे मामले को एक दूसरे पर डाल रहे हैं। इसके चलते जांच और कार्रवाई प्रभावित हो रही है। इससे पहले भी जल संसाधन विभाग के अफसरों पर कई तरह के आराेप लगे हैं। उन मामलों में भी जांच की बात कहकर मामले को टालने का खेल जारी है। कुछ दिन पहले एक बड़े अफसर ने कई मामलों की फाइल मंगाई है। इसके बाद छोटे अफसरों के माथे पर पसीना शुरू हो गया है। कई मामलों में जल्द जांच होने की फिर बात कही जा रही है।
दूसरा टेंडर निविदा क्रमांक 14 था जो 14 सितंबर 2017 को जारी किया गया था। टेंडर में जल संसाधन परिसर स्थित कांफ्रेंस हाल में 9.02 लाख की राशि से वाल फेंसिंग फ्रेम का काम होना था। टेंडर होने के बाद एग्रीमेंट में काम पूरा करने के लिए एक माह का समय नियत था। काम इसलिए शुरू नहीं हो सका क्योंकि यह काम टेंडर जारी होने के पहले ही हो चुका है।
संभागीय लेखा अधिकारी ने भी रोका था भुगतान
इस मामले में एक टेंडर पूर्व में ही निरस्त हो गया है जबकि दूसरे टेंडर का भुगतान नहीं किया गया है। मामले की कलई खुलने पर पूर्व चीफ इंजीनियर एसके अवधियां ने भी इसे गंभीर चूक मानते हुए कार्रवाई करने की बात कही थी।
यह तो सीई को बताना चाहिए आप उनसे पूछिए
प्रार्थना भवन में जांच का क्या मामला है और अब तक क्यों कार्रवाई नहीं हुई। बनने के एक साल बाद ही कैसे उखड़ रही है परतें, यह सब सीई से पूछिए। फोन क्यों नहीं उठा रहे हैं। उन्हें मामले के बारे में बताना चाहिए। आप उनसे पूछिए। एचआर कुटहरे, ईएनसी, जल संसाधन विभाग, बिलासपुर