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पांच दिन पहले लगाया था नींद का इंजेक्शन, उठ नहीं पाई महिला

3 वर्ष पहले
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जिला अस्पताल में शुक्रवार की सुबह एक महिला की मौत हो गई। उसके परिजनों ने आरोप लगाया कि पांच दिन पहले महिला को नींद का इंजेक्शन लगाया था। 72 घंटे में होश आने की बात कही गई थी लेकिन उसकी मौत हो गई। चकरभाठा क्षेत्र के ग्राम छतौना निवासी लक्ष्मीन बाई साहू 55 वर्ष को खाने के बाद उल्टियां होने लगती थी। परिजनों ने 12 दिन पहले उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वह फीमेल वार्ड में भर्ती थी। वह कुछ दिनों तक स्वस्थ थी लेकिन फिर उसकी हालत बिगड़ने लगी। धीरे-धीरे वह घरवालों को नहीं पहचान पा रही थी। डॉक्टर ग्लूकोज की बोतल चढ़ाते थे। शुक्रवार को सुबह 11.30 बजे उसकी मौत हो गई। लक्ष्मीन के दामाद अशोक साहू ने बताया कि एक दिन मरीज को ठीक से नींद नहीं आ रही थी। इस बारे में डॉक्टर को बताया गया। फिर एक डॉक्टर ने मरीज को नींद का इंजेक्शन लगाया। इसके बाद महिला को होश ही नहीं आया। तब पूछने पर बताया गया था कि 72 घंटे में होश आ जाएगा। पांच दिन गुजर गए और अंत तक होश नहीं आया और उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि मरीज की आर्थिक स्थिति कमजोर है। उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। मरीज को अस्पताल में भर्ती कराते समय परिजनों ने स्मार्ट कार्ड जमा कर दिया था। इसके बावजूद 8-9 हजार रुपए खर्च हो गए। डॉक्टर जांच के लिए मरीज को बाहर भेजते थे। उसे अस्पताल में मिलने वाली दवाई नहीं लिखते थे। परिजनों ने कहा कि यदि ठीक से इलाज किया गया होता तो लक्ष्मीन की मौत नहीं होती।

पता नहीं- क्या बीमारी थी
जिला अस्पताल के वार्ड में बिलखते परिजन।

जांच रिपोर्ट भी किसी डॉक्टर ने नहीं बताया
लक्ष्मीन के दामाद अशोक ने बताया कि भर्ती होने के कुछ दिनों बाद डॉक्टर ने सीटी स्केन जांच कराने की बात कही। यहां सीटी स्केन की सुविधा नहीं है। जांच के लिए मरीज काे सिम्स भी रेफर नहीं किया गया। लिहाजा बाहर से सीटी स्केन जांच कराना पड़ा।

मरीज के बारे में मुझे जानकारी नहीं है कि उसे कौन सी बीमारी थी। मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर ही बताएंगे। डॉ. मनाेज जायसवाल, आरएमओ

आज मेरा राउंड नहीं था। मैं उस मरीज को नहीं देख रहा था। वह बेड नंबर 6 पर थी। उसे शायद लकवा की बीमारी थी। डॉ. अनिल गुप्ता, जिला अस्पताल

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