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682 स्कूलों में बिजली नहीं, असुरक्षित हैं बच्चे

3 वर्ष पहले
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शहर और आस-पास के सरकारी स्कूलों का बुरा हाल है। अधिकारी जानबूझकर सुरक्षा और सुविधाएं मुहैया करने में ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसके कारण बच्चों की सुरक्षा और दूसरी बातों के लेकर सवाल उठने लगा है। कई स्कूलों में रसूखदारों ने कब्जा कर रहा है, जो शाम ढलते ही इनका बेजा इस्तेमाल करते हैं। प्रबंधन की इजाजत के बगैर स्कूल में प्रवेश और दूसरी गतिविधियां आम हो जाती है

जिले के 1399 स्कूल ऐसे हैं, जहां बाउंड्रीवाल ही नहीं है। ऐसे में अधिकांश स्कूलों के परिसर में जनप्रतिनिधियों और रसूखदारों का कब्जा है। वे स्कूल प्रबंधन की इजाजत के बगैर स्कूल परिसर का इस्तेमाल करते हैं। शासन से फंड नहीं मिलने के कारण जिले के 1399 प्राइमरी, मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में बाउंड्रीवाल ही नहीं बन सका है। बाउंड्री नहीं होने से स्कूल के शिक्षकों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ऐसे स्कूलों के परिसर में रसूखदारों का कब्जा है। शहर के लिंगियाडीह प्राइमरी स्कूल और शिवाजी राव स्कूल भी बगैर बाउंड्री के हैं। जब शहरी क्षेत्र के स्कूलों का यह हाल है तो ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की कल्पना की जा सकती है। लिंगियाडीह में पिछले एक साल से किसी रसूखदार का निर्माण सामग्री रेत, गिट्टी और ईंट डंप है। स्कूल प्रबंधन के मना करने के बाद भी वे अपनी मर्जी से यहां सामग्री को डंप कराया है। इतना ही आसापास के लोग निजी कार्यक्रमों के लिए भी स्कूल परिसर का इस्तेमाल करते हैं। अभी भी शादी के लिए स्कूल परिसर को कब्जा कर लिया गया है। उन्हें मना करने के बाद भी नहीं मानते। शिक्षकों ने बताया कि बीईओ, डीईओ को इसकी जानकारी दी जा चुकी है, इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

682 स्कूलों में बिजली नहीं

23 प्राइमरी स्कूल

127 मिडिल स्कूल

14 हाईस्कूल

18 हायर सेकेंडरी

अफसरों ने नहीं दिया ध्यान

स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि शाम होते ही ऐसे स्कूलों के परिसर शराबियों और जुआरियों का अड्डा बन जाता है। सुबह स्कूल आने पर शराब की बाेतलें स्कूल परिसर में अस्त-व्यस्त पड़ी मिलती है। हर रोज की यही समस्या है। स्कूल के शिक्षकों को अपने पैसे साफ-सफाई कराना पड़ता है। इसके चलते परेशानी बरकरार है।

इस पर भी ध्यान देने की जरूरत

27 भवनविहीन और 15 स्कूल जर्जर भवनविहीन हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल- बैमा, बहतराई, लिंगियाडीह, सेलर, कन्या सीपत, झलमला, सोन, हिर्री, बेलपना, दैजा, कन्या सकरी, लिम्हा, जूनापारा, तेंदुआ, धूमा, धौराभाठा, करैहापारा, कर्रा, परसदा, सारधा, बिटकुली, भटचौरा, सोंठी, मल्हार, दर्राभांठा, भरनी हैं।

जर्जर स्कूल- सूरजमल बिल्हा, कन्या स्कूल बिल्हा, चांटीडीह, बिजौर, डंगनिया, बालक मस्तूरी, खम्हरिया, गतौरा, बालक सीपत, बालक सकरी, गनियारी, करगीकला, खोंगसरा, डीकेपी कोटा, कन्या कोटा।

कई स्थानों पर स्कूलों की मरम्मत का काम शुरू हो चुका है। कई जगहों पर थोड़ी परेशानी बरकरार है। स्कूलों के लिए ये प्रस्ताव भेजा गया है। हेमंत उपाध्याय, डीईओ, बिलासपुर

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