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आग से हर साल जलते हैं केबल, अफसर बेपरवाह

3 वर्ष पहले
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रेलवे स्टेशन के रूट रिले केबिन के पीछे के हिस्से में झाड़ियां उग आई हैं। हर साल गर्मी में यहां पर आगजनी की घटना होती है। उसके बाद भी रेलवे प्रशासन इसे साफ करने की ओर ध्यान नहीं देता है। इससे किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसमें हर साल लाखों रुपए के केबल जल जाते हैं।

रेलवे स्टेशन के लाइन नंबर 11-12 के बाद रूट रिले केबिन के पीछे जहां पर पुराना लोको शेड था। उसकी बिल्डिंग खंडहर की तरह अभी भी मौजूद है। उसी जगह पर लोको खोली साइड तक पटरियों के बीच की खाली जमीन पर झाड़ियां उग आई है। हर साल बारिश में ये झाड़ियां घनी हो जाती है। गर्मी आते-आते ये झाड़ियां सूखने लगती है। अभी भी हालत ऐसे ही है। इन झाड़ियों के आसपास कुछ कार्यालय भी हैं। जहां पर कर्मचारियों का आना जाना लगा रहता है। लोको खोली से आने-जाने वाले भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। पिछले साल इन झाड़ियों में 8 बार आग लगी थी। इस बार फिर से आगजनी की घटना होने की संभावना बढ़ गई। झाड़ियां बड़े पैमाने पर उग आई हैं। तेज गर्मी पड़ने के साथ ही झाड़ियां भी सूखने लगी है। चूंकि वहां से लोगों का आना जाना लगा रहता है इसलिए आगजनी होने की संभावना अधिक होती है। जली हुई बीड़ी या सिगरेट भी लोग झाड़ियों में डाल देते हैं इससे आग भड़क जाती है। इसके अलावा गर्मी की वजह से भी अचानक आग लग जाती है। रेलवे प्रशासन चाहे तो बारिश बंद होने के फौरन बाद इन झाड़ियों की सफाई कराकर इस समस्या से निजात पा सकता है लेकिन इस ओर ध्यान नहीं जाता है। आग लगने पर क्षेत्र की बहुत से व्यवस्थाएं चौपट होने का अंदेशा होता है। आग लगने से सिग्नल के केबल जल जाते हैं। कुछ सिग्नल शार्ट सर्किट की वजह से काम करना बंद कर देते हैं। छोटी से छोटी आगजनी की घटना भी लाखों रुपए के केबल को जलाकर समस्या खड़ा कर देती है।

रूट रिले केबिन के पीछे पुराने लोको शेड की खाली जगह की झाड़ियों में आग लगती है तो बुझाने दौड़ते हैं कर्मचारी

रेलवे स्टेशन के रूट रिले केबिन के पीछे हिस्से में उगी झाड़ियां जिसमें हर साल आग लगती है।

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