सीयू के छात्र कर रहे अजोला का उत्पादन, इससे मवेशी देते हैं ज्यादा दूध
जलीय पौधा अजोला पर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने शोध किया है। इसमें छात्रों ने पाया कि अजोला का शुष्क भार के आधार पर इसमें 25-35 प्रतिशत प्रोटीन, 10-15 प्रतिशत खनिज तत्व, 7-10 प्रतिशत एमीनो एसिड, आयरन-1000-8600 पीपीएम, काॅपर 3-50 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन), मैग्नीज 1200-2700 पीपीएम, विटामिन ए, विटामिन बी12, बीटा कैरोटिन और क्रूड फैट 6.1 से 7.7 प्रतिशत आदि अनेक प्रकार के तत्व पाए जा रहे हैं। अजोला को अगर 1 किलोग्राम इसे खिलाते हैं तो इनका 1 लीटर तक दूध बढ़ जा रहा है। वहीं पशुओं के शरीर के लिए भी फायदेमंद है।
अजोला एक जलीय पौधा है, जो पानी के ऊपरी सतह पर तैरता रहता है। यह वातावरणीय नाइट्रोजन का अवशोषण कर उन्हें संचित करता है। वर्तमान में इसे पशु चारे के रूप में बहुतायत से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसको लेकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के ग्रामीण एंड प्रौद्योगिकी विभाग के छात्रों ने प्रोफेसर डाॅ. दिलीप कुमार व संजीव कुमार भगत के निर्देशन में शोध किया। छात्रों ने अजोला का उपयोग डेयरी के पशुओं को नियमित रूप से 1 से 1.5 किलोग्राम खिला कर देखा। इसमें दूध के उत्पादन में 1 से 1.3 लीटर प्रतिदिन बढ़ोत्तरी पाई गई है। डॉ. पुष्पराज सिंह ने बताया कि डेयरी उत्पादन में ज्यादातर चारे की फसलें जैसे-हाइब्रिड नेपियर, जिसमें 4 प्रतिशत प्रोटीन, लुर्सन में 3.2 प्रतिशत, काऊपी में 1.4 प्रतिशत और ज्वार में 0.6 प्रतिशत प्रोटीन पाया जा रहा है, जबकि अजोला में यह सारी मात्रा इससे 20-25 प्रतिशत तक पाई जा रही हैं। अजोला को दूधारू पशुओं को खिलाने पर पशुओं के भौतिक दशा के साथ-साथ शारीरिक आकारिकी में भी परिवर्तन दिखाई दे रहा है, जैसे त्वचा, बालों और आखों में चमक के साथ-साथ शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास हो रहा है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोग के आधार पर अजोला का लगातार सेवन करने वाली गायों में दुग्ध उत्पादकता 1 किलो से 1.3 किलो तक बढ़ी हुई पाई गई।
सीयू में छात्र ने अजोला के उत्पादन के लिए 9 टैंक बनाएं।
एक दिन में कर रहे 10 किलो उत्पादन
अजोला के उत्पादन पर कृषि विभाग के साथ-साथ विभिन्न गैर सरकारी संगठन जो डेयरी व्यवसाय से जुडे हैं। अजोला उत्पादन पर जोर दे रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा इसके विकास और जानवरों पर इसके प्रभावों के अध्ययन के लिए विभिन्न परियोजनाएं कृषि अनुसंधान केंद्रों को स्वीकृत की गई है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी के ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं द्वारा पढाई के साथ-साथ अजोला का उत्पादन का कार्य विभाग के शिक्षक डाॅ. दिलीप कुमार और संजीव कुमार भगत के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी में उत्पादन कर छात्र 15 रुपए प्रति किलो के हिसाब से डेयरी को उपलब्ध करा रहे हैं।