एनजीटी कमिश्नर ने पूछा- खुदाई क्यों, अफसर बोले- निजी जमीन है
गेवरा से पेंड्रा तक बन रही 37 किमी तीसरी रेल लाइन का निरीक्षण करने पहुंचे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर के सवालों का राजस्व अधिकारी जवाब नहीं दे सके। रेल लाइन बना रही कंपनी के अधिकारियों के जवाब से भी कमिश्नर संतुष्ट नहीं दिखे। कमिश्नर संदीप मिश्रा ने राजस्व, वन और कंपनी के अधिकारियों के साथ मड़ना, सारबहरा और सधवानी में जाकर निर्माणाधीन रेल लाइन का जायजा लिया। इससे पहले गौरेला के विश्राम गृह में सभी की ढाई घंटे तक बैठक लेकर दस्तावेजों की पड़ताल की। पूरे दिन याचिकाकर्ता और अफसरों के बीच विवाद होता रहा।
गेवरारोड पेंड्रा रेल कॉरिडोर के निर्माण में वन विभाग से अनुमति लिए बगैर काम शुरू किए जाने के मामले में एनजीटी से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर मिश्रा निरीक्षण के लिए रविवार को सुबह 11.30 बजे गौरेला पहुंचे। उन्होंने याचिकाकर्ता सुदीप श्रीवास्तव, एडीएम पेंड्रा बीएस उइके, एसडीएम नूतन कंवर, मरवाही डीएफओ वी मातेश्वरन व राजस्व अधिकारियों के साथ गौरेला विश्राम गृह में बैठक की। बैठक के बाद कमिश्नर मिश्रा अधिकारियों के साथ रेल लाइन का निरीक्षण करने मड़ना गए। वहां कोर्ट कमिश्नर ने राजस्व अधिकारियों से पूछताछ की। राजस्व अधिकारियों ने पटवारी सरोज लता को आगे किया लेकिन वे ठीक से जवाब नहीं दे पाई। जिस खसरा नंबर 55/1 के रेल लाइन में आने को लेकर याचिकाकर्ता श्रीवास्तव ने आपत्ति की, उसे पटवारी ने रेल लाइन में नहीं होना बताया लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि बगैर सीमांकन स्पष्ट तौर पर कह पाना मुश्किल है। रेल लाइन की दाई तरफ भारी मात्रा में जमीन की खुदाई को लेकर कमिश्नर ने सवाल पूछे तो उन्हें बताया गया कि यह निजी भूमि है। उन्होंने राजस्व अधिकारियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी। वहीं बाई तरफ चल रहे मिट्टी उत्खनन को लेकर भी उन्होंने जानकारी देने कहा। इस बीच याचिकाकर्ता और कंपनी के अधिकारी मिश्रा के बीच नोकझोंक होने लगी। तब कमिश्नर ने अधिकारी को चेतावनी दी कि उन्हें जो भी कहना है, उनसे कहे। याचिकाकर्ता से सीधे बात न करे। ऐसा फिर नहीं होना चाहिए। अचानक तेज बारिश होने की वजह से वहां से सभी को आना पड़ा। लंच के बाद कमिश्नर सभी के साथ सारबहरा गए और वहां हो रहे निर्माण कार्यों के संबंध में पूछताछ की। तब भी बारिश हो रही थी। वहां जेसीबी से उत्खनन हो रहा था। कमिश्नर ने एसडीएम से अमला भेजकर उसके बारे में पूछताछ करने के निर्देश दिए। इसके बाद सभी सधवानी गए। कमिश्नर ने रेल लाइन के लिए काटे गए पेड़ों का जायजा भी लिया। 16 अप्रैल को वे मड़ना और अन्य स्थानों का जायजा लेंगे। 5 मई तक वे रिपोर्ट सौंपेंगे और 7 मई को इस मामले की सुनवाई होगी।
बिना अनुमति पेड़ काटने पर याचिका
एनजीटी कमिश्नर निरीक्षण में अफसरों से सवाल पूछते हुए।
रेल लाइन व पेड़ कटाई के फोटो खिंचवाए
कोर्ट कमिश्नर मिश्रा ने रेल लाइन, पेड़ कटाई और कारीडोर बनाने के लिए खोदे गए गड्ढों की फोटो खिंचवाई। उन्होंने इसके लिए एक फोटाग्राफर नियुक्त किया था। कैमरे में जीपीएस सेट करवाकर उन्होंने तस्वीरें खिंचवाई। जीपीएस सेट करने से फोटो उसी जगह के होने की पुष्टि हो जाती है।
ये है पूरा मामला
गेवरा-पेंड्रा रेल कॉरीडोर में राजस्व व वनभूमि में भी काम होना है। सितंबर 2014 में सिंगल लाइन के लिए पर्यावरण मंत्रालय को क्लीयरेंस के लिए दिए आवेदन में 500 हेक्टेयर वन भूमि व 265 राजस्व भूमि होने का उल्लेख किया गया था। 2015 में इसे डबल लाइन किया गया, लेकिन आवेदन में 459 हेक्टेयर वनभूमि व 486 हेक्टेयर गैर वनभूमि होना बताया गया। 19 जुलाई 2016 को 197 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया। इसके तहत पटरी के लिए जमीन समतल करने, पुल- पुलिया का निर्माण शामिल था। बिलासपुर निवासी वकील सुदीप श्रीवास्तव ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि रेल कॉरिडोर के काम में वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। पर्यावरणीय स्वीकृति के बगैर काम शुरू कर दिया गया है। अवैध रूप से खुदाई करने के साथ कई पेड़ काटे गए हैं।
अचानक पहुंचे नेता, विवाद नहीं
एनजीटी के कमिश्नर निरीक्षण में पहुंचे तो गौरेला विश्राम गृह में कांग्रेस और जकांछ के नेता पहुंच गए। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी भी पहुंचे। पूरे निरीक्षण के दौरान सभी मौजूद रहे। जकांछ के नेता व पदाधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए कांग्रेस नेता व कार्यकर्ताओं की वहां मौजूदगी की चर्चा रही। हालांकि पूरे दिन कोई विवाद नहीं हुआ।