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आत्मा की शांति के लिए कार्य करें: पंथक

3 वर्ष पहले
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गुजराती भवन में कार्यक्रम चल रहा है। मुनि श्री पंथक महाराज ने रविवार को प्रवचन की शुरुआत नवकार मंत्र के जाप से की। सहवेदना को लेकर कहा कि सहस रूप से वेदन कर सकें। उन्होंने कहा कि आत्मा की शांति के लिए कार्य करना चाहिए। जैसे की हम सभी जन्माष्टमी मनाते हैं उसमें श्री कृष्ण जी का जन्मोत्सव मनाते हैं।

कोई व्यक्ति यह नहीं सोचता कि कृष्ण के माता-पिता वासुदेव और देवकी को क्या भयंकर वेदना सहनी पड़ी होगी। उन्होंने कहा कि देवकी को बालक जन्म देने की असहनीय पीड़ा को सहन करना पड़ा होगा। बालक श्रीकृष्ण का जन्म हुआ और जन्म होते ही वासुदेव ने उस बालक कृष्ण को तुरंत ही गोकुल ले जाने के लिए देवकी से कृष्ण को छीन लिया। वासुदेव उन्हें गोकुल ले गए यह भी भयंकर वेदना थी। प्रवचन में श्रीराम के वनवास को बताया। इसमें कहा कि राम, सीता और लक्ष्मण नदी पार करने के लिए कहते हैं और नाविक ने एक वचन मांगा कि मुझे आपके पैर एक बार धोना है। प्रभु राम ने अपने पैर धोने के लिए एक पत्थर पर रखे तो उस पत्थर में से सुंदरी बन गई, उसका नाम अहिल्या था। उसे श्राप मिला था कि जब तक प्रभु राम यहां आकर तुम पैर ना रख दें तुम पत्थर की बनी रहोगी। इसके बाद नाविक ने नदी पार कराई। श्रम का मूल देने के लिए श्रीराम ने कहा तो नाविक ने कहा कि प्रभु आपका व्यवसाय और मेरा व्यवसाय तो एक ही है मैं भी इस नदी से नौका पार करता हूं और आप भी सभी मनुष्यों को सांसारिक सागर से पार लगाते हो तो आप से कुछ लेना ही नहीं चाहिए। इस अवसर पर समाज सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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