बंगाली समाज के लोगों ने एक-दूसरे को शुभो नोबो बोरसो कह दी बधाई
बंगाली समाज के लोगों द्वारा बंगाली नववर्ष अप्रैल महीने के मध्य में मनाया जाता है। इस अवसर पर शहर के काली मंदिरों में समाज के लोगों के द्वारा विशेष पूजा अर्चना की गई। इस दौरान बंगाली समाज के लोगों ने एक-दूसरे को शुभो नोबो बोरसो कहकर नए साल की बधाई दी। घरों में समाज की महिलाओं के द्वारा विभिन्न पकवान बनाए गए। सभी ने रविवार के दिन नए कपड़े पहनकर मंदिर में माता की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
खरमास के बाद बैसाख शुरू हो गया। बैसाख के पहले दिन बंगाली समुदाय नववर्ष मनाता है। बंगाली समुदाय ने धूमधाम से नववर्ष का स्वागत किया। सुबह काली मंदिरों में पूजा अर्चना से शुरुआत हुई और शाम को अनेक जगहों पर कार्यक्रम किए। बंगाल में इसे पोहेला बोईशाख कहा जाता है। बंगाल में इस पूरे महीने को शुभ माना जाता है। शहर के कल्याण बाग अरपांचल काली मंदिर समेत अन्य मंदिरों में पूजा की गई। मंदिर के पुजारी धनंजय भट्टाचार्य ने बताया कि सुबह 4:30 बजे मंगल आरती, 8 बजे से मां की पूजा शुरू हुई, दोपहर 12 बजे तक समाज के लोगों की भीड़ लगी रही। शाम को मंदिर परिसर में अमावस की पूजा की गई। आरती करने समाज के लोगों की भीड़ उमड़ी। काली माता को पुलाव, छोले, पनीर, आम की चटनी के साथ फलों को भोग लगाया गया।
नववर्ष पर काली मां की पूजा करते हुए पुजारी।
सभी ने नए वस्त्र पहने
नववर्ष के अवसर पर बंगाली समाज के लोगों ने नए कपड़े पहनकर पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने नए गहने पहने। बड़ो के साथ ही समाज की महिलाओं और बच्चों ने भी खुशी के साथ नववर्ष मनाया। समाज के लोगों ने बताया कि इस त्योहार बेसब्री से पूरे साल इंतजार रहता है।
बंगला भवन में मना नववर्ष
छत्तीसगढ़ बंगाली समाज एवं विकास समिति के द्वारा तोरवा स्थित बंगला भवन में नववर्ष मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रस्तावों को पास कराया गया। इसके साथ ही नववर्ष की एक-दूसरे को बधाई भी दी गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष आरएन नाथ, प्रदेश महासचिव पल्लव धर, पार्थो चक्रवर्ती, डॉ. अनूप विश्वास, सोभन कुमार भट्टाचार्य, अमलन दत्ता, देवाशीष डे, माधुरी राय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।