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आपातकाल का इतिहास पाठ्य पुस्तकों में शामिल हो - उपासने

3 वर्ष पहले
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बिलासपुर | आपातकाल के इतिहास को पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाए। साथ ही शासन छत्तीसगढ़ के सेनानियों को मध्यप्रदेश के सेनानियों की तरह सुविधा प्रदान करे। इन मांगों व मुद्दों को लेकर 26 जून को आपातकाल की वर्षगांठ पर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने शनिवार को पत्रवार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रायबरेली चुनाव को अवैध घोषित कर दिया। उनकी संसद सदस्यता को खारिज कर दिया। जनादेश व न्यायपालिका के निर्णय को स्वीकार करने की लोकतांत्रिक कृति का अभाव इंदिरा गांधी में होने के कारण देश में 26 जून 1975 को आपातकाल घोषित किया गया। इस दौरान आरएसएस समेत कई संगठनों के हजारों कार्यकर्ताओं को जेलों में डाल दिया गया। अखबारों की आजादी छीन ली गई। देशभर में 50 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया। उपासने ने बताया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सामने आये लोकतंत्र सेनानियों की इस बहादुरी को बताने आपातकाल के इतिहास को पाठ्यपुस्तक में शामिल करने व छत्तीसगढ़ के सेनानियों को एमपी के सेनानियों की तरह सुविधा प्रदान करने संघ ने राज्य शासन से मांग की है।

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