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सर्जरी के बाद जांच हुई तो खराब निकलीं 7 की आंखें

3 वर्ष पहले
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राज्यभर में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आंखों की रौशनी जाने के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बिलासपुर और रायपुर में केस सामने आने के बाद गरियाबंद के देवभाेग में 7 मरीजों की एक आंख की रौशनी चली जाने का केस सामने आया है। गरियाबंद जिला प्रशासन ने रायपुर में केस सामने आने के बाद जांच करवायी। प्रारंभिक जांच में ही 7 मरीज मिल गए। इनमें कुछ की आंखों की रौशनी पूरी तरह जा चुकी है। जिला प्रशासन ने जांच के बाद स्वास्थ्य संचालनालय को रिपोर्ट भेज दी है। उसके बाद से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य संचालक रानू साहू ने आनन-फानन में सभी अस्पतालों को चिट्ठी जारी कर मरीजों का फालोअप निर्धारित समय में करने का निर्देश दिया है। मरीजों की आंखों की रौशनी जाने के कारणों की भी जांच के निर्देश भी दे दिए गए हैं। शेष|पेज 7



रायपुर में एम्स और उसके पहले बालोद में मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद मरीजों की आंखों की रौशनी जा चुकी है। इसी वजह से गरियाबंद में मोतियाबिंद के बाद आंखों की रौशनी जाने का केस सामने आने से पूरा अमला हरकत में आ गया है। गरियाबंद जिला प्रशासन ने भी अपने स्तर पर पिछले दो साल में जितने भी मरीजों के आंखों की सर्जरी हुई, उन सभी की जांच करवाने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन की प्रारंभिक जांच में ही 7 मरीजों की आंखों में किसी न किसी तरह का इंफेक्शन निकला। दो आंखों की रौशनी तो पूरी तरह जा चुकी है। उनका अंबेडकर अस्पताल में इलाज चल रहा है। कुछ मरीज अभी वहीं हैं। खबर है कि कुछ मरीज तो इलाज करवाने ओडिशा जा चुके हैं। उनका रिकार्ड यहां नहीं है। स्वास्थ्य संचालक ने उस इलाके के सभी प्राइवेट अस्पतालों से जानकारी मांगी है उन्होंने कितने मरीजों का इलाज किया और कितनी बार उन्हें फालोअप के लिए बुलवाया।

स्मार्ट कार्ड में ज्यादा लापरवाही

देवभोग में अभी तक जिन मरीजों की आंखों की राैशनी जाने की बात सामने आई है, उन सभी का इलाज स्मार्ट कार्ड से किया गया है, लेकिन मरीजों को अस्पताल का नाम ही नहीं मालूम। वे नहीं जानते कि उन्हें किस अस्पताल में ले जाया गया था। मरीजों के पास अस्पताल की डिस्चार्ज टिकट या कोई पर्ची नहीं है, जबकि उनकी सर्जरी स्मार्ट कार्ड से हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्मार्ट कार्ड का संचालन करने वाली नोडल एजेंसी को जानकारी भेजी गई है। एजेंसी के माध्यम से पता चल जाएगा कि किस मरीज का इलाज किस प्राइवेट अस्पताल में हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से गरियाबंद क्षेत्र के कुछ अस्पतालों को नोटिस भेजकर जानकारी मांगी गई है कि उनके अस्पताल में किन मरीजों की कब मोतियाबिंद सर्जरी की गई है।



शिकायतों के बाद करवायी जांच- कलेक्टर गरियाबंद

गरियाबंद के कलेक्टर श्याम धावड़े का कहना है कि अभी तक 7 मरीज ऐसे हैं, जिनकी आंखों में इंफेक्शन मिला है। दो को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल इलाज के लिए भेजा गया है। बाकी मरीजों का ट्रीटमेंट अभी यहीं चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग को पूरी रिपोर्ट भेज दी गई है।

ऐसे चल रहा रैकेट

गरियाबंद और रायपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर अभी तक की गई जांच में जो संकेत मिले हैं उसके अनुसार बड़े प्राइवेट अस्पताल स्मार्ट कार्ड से मोेतियाबिंद की सर्जरी करने के लिए एजेंटों के माध्यम से मरीजों को अपने अस्पताल लाते हैं, लेकिन ऑपरेशन के बाद उनका बेहतर और निर्धारित मापदंड के अनुसार फालोअप नहीं कर रहे हैं। इसी वजह से मरीजों की आंखों की रौशनी जा रही या कम हो रही है।

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