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अफसर को नहीं पता कि निगम में कितने निजी स्कूल

3 वर्ष पहले
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राज्य सरकार की ओर से जिला शिक्षा अधीक्षक को आरटीई सेल का नोडल पदाधिकारी बनाया है। जो सभी निजी स्कूलों के निबंधन, पूरे किए जाने वाले मानक सहित सभी तरह के कार्यो की मॉनिटरिंग करेंगे, लेकिन सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि नोडल पदाधिकारी को चास नगर निगम क्षेत्र के निजी स्कूलों की संख्या भी मालूम है। यह खुलासा आरटीआई से हुआ है।

इस तरह कैसे होगी निजी स्कूलों की मॉनिटरिंग, स्कूल करेंगे मनमानी

क्या-क्या है प्रावधान | किसी भी विद्यालय में नामांकन के लिए अभ्यर्थी छात्रों का ना तो किसी भी प्रकार का स्क्रीनिंग टेस्ट किया जाएगा और ना ही कोई लिखित या मौखिक परीक्षा ली जाएगी। छात्रों के अभिभावकों का भी विद्यालय द्वारा कोई साक्षात्कार आदि नहीं लिया जाएगा। इस संबंध में विद्यालय प्रबंधन द्वारा नामांकन के लिए अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप पारदर्शी विधि निर्धारित कर उसका अनुपालन करते हुए छात्रों का नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। निजी विद्यालयों में प्रवेश कक्षा की कुल सामर्थ्य संख्या के 25 प्रतिशत की संख्या में विद्यालय के आसपास के कमजोर एवं अभिवंचित वर्गों के परिवारों के बच्चों का नामांकन विद्यालय प्रबंधन द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।

अनुपालन संभव नहीं

अगर निजी विद्यालयों की संख्या की जानकारी नोडल पदाधिकारी यानी डीएसई के पास नहीं है तो फिर अनिवार्य और बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम का अनुपालन होना नामुमकिन है।



वास्तविक संख्या उपलब्ध नहीं है: डीएसई

डीएसई वीणा कुमारी से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि चास नगर निगम क्षेत्र में कितने गैर सरकारी स्कूल हैं। इसका पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

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