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महिला हिंसा रोकने के लिए जिले में अब तक नहीं खुला हेल्पलाइन केंद्र

3 वर्ष पहले
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महिलाओं के विरुद्ध हो रही हिंसा, उत्पीड़न की रोकथाम के लिए समाज कल्याण विभाग को बोकारो में जिला स्तरीय हेल्पलाइन का संचालन करना था। हेल्पलाइन का संचालन झारखंड महिला विकास समिति को करना था। मगर अब तक यह केंद्र जिले में स्थापित नहीं हो सका। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को आवंटित की गई राशि 10 लाख 66 हजार रुपए सरकार ने वापस मंगा ली है।

सरकार की ओर से यह आया था निर्देश

राज्य स्तरीय महिला हेल्पलाइन में ऐसे टोल फ्री दूरभाष की स्थापना की जानी थी। जिसपर पूरे राज्य से नि:शुल्क संपर्क स्थापित किया जा सके।

जिला स्तरीय हेल्पलाइन पूरे जिला में नि:शुल्क एवं निरंतर उपलब्ध करने की बात कही गई थी। साथ ही हेल्पलाइन के संचालन के लिए ऐसे स्थानों का चयन करने को कहा गया था, जहां सुगमता से पहुंचा जा सके। यदि जिले में कोई सरकारी भवन की उपलब्धता हो तो उसे प्राथमिकता देने को कहा गया था। हेल्पलाइन के लिए परिसर के चयन में इस बात का ख्याल रखने को कहा गया है कि परिसर में कम से कम चार कमरे तथा शौचालय की उपलब्धता हो। ताकि परामर्श सेवाओं में गोपनीयता बरती जा सके। विषम परिस्थिति में महिला को एक दो दिन के लिए आश्रय भी दिया जा सके।

ये सेवाएं मिलनी थी हेल्पलाइन के माध्यम से

चिकित्सीय सुविधा, विधिक सहायता, अल्पावास गृह, मुक्त कराना, गुमशुदा महिलाएं, बालिकाएं, परामर्श सेवाएं एवं भावनात्मक सहयोग आदि शामिल हैं। हेल्पलाइन के माध्यम से विभिन्न सरकारी अस्पतालों से समन्वय स्थापित कर महिलाओं के लिए आवश्यकतानुसार चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित की जानी थी। वहीं महिलाओं की समस्या के अनुरूप यथोचित विधिक परामर्श विधि परामर्शदात्री के माध्यम से महिलाओं को दिया जाना था। साथ ही आवश्यकतानुरुप उन्हें त्वरित एवं नि:शुल्क न्याय दिलाने की प्रक्रिया हो सके।

अल्पावास गृह की होनी थी व्यवस्था | महिला हेल्पलाइन की ओर से आवश्यकता के अनुसार महिलाओं को किसी अल्पावास गृह में आश्रय देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी थी। अल्पावास गृह में प्रवास के दौरान उसकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी थी। विशेष परिस्थिति में महिला को हेल्पलाइन परिसर के कमरे में वैकल्पिक व्यवस्था होने तक एक या दो दिन तक रखना था। किसी गुमशुदा महिला, बालिका को पुलिस की मदद से ढूंढ़ने की पहल होती। इतना ही नहीं हेल्पलाइन से पीड़िता के लिए परामर्श सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी थी। ताकि उसे अपनी मनोस्थिति से उबरने में सहयोग तथा सही निर्णय लेने के लिए यथोचित मार्गदर्शन प्रदान किया जा सके।

प्रयासरत है जिला प्रशासन

सिटी रिपोर्टर | बोकारो

महिलाओं के विरुद्ध हो रही हिंसा, उत्पीड़न की रोकथाम के लिए समाज कल्याण विभाग को बोकारो में जिला स्तरीय हेल्पलाइन का संचालन करना था। हेल्पलाइन का संचालन झारखंड महिला विकास समिति को करना था। मगर अब तक यह केंद्र जिले में स्थापित नहीं हो सका। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को आवंटित की गई राशि 10 लाख 66 हजार रुपए सरकार ने वापस मंगा ली है।

सरकार की ओर से यह आया था निर्देश

राज्य स्तरीय महिला हेल्पलाइन में ऐसे टोल फ्री दूरभाष की स्थापना की जानी थी। जिसपर पूरे राज्य से नि:शुल्क संपर्क स्थापित किया जा सके।

जिला स्तरीय हेल्पलाइन पूरे जिला में नि:शुल्क एवं निरंतर उपलब्ध करने की बात कही गई थी। साथ ही हेल्पलाइन के संचालन के लिए ऐसे स्थानों का चयन करने को कहा गया था, जहां सुगमता से पहुंचा जा सके। यदि जिले में कोई सरकारी भवन की उपलब्धता हो तो उसे प्राथमिकता देने को कहा गया था। हेल्पलाइन के लिए परिसर के चयन में इस बात का ख्याल रखने को कहा गया है कि परिसर में कम से कम चार कमरे तथा शौचालय की उपलब्धता हो। ताकि परामर्श सेवाओं में गोपनीयता बरती जा सके। विषम परिस्थिति में महिला को एक दो दिन के लिए आश्रय भी दिया जा सके।

घरेलू हिंसा को रोकने के लिए टोल फ्री दूरभाष की स्थापना की जानी है। जिला प्रशासन घरेलू हिंसा को रोकने के लिए प्रयासरत है। महिलाओं को भी चाहिए कि अगर वे हिंसा की शिकार हैं तो जिला प्रशासन के पास आकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। कार्रवाई होगी।’’ डॉ. सुमन गुप्ता, समाज कल्याण पदाधिकारी, बोकारो।

क्या है घरेलू हिंसा | किसी भी महिला के साथ उसके पति या पति के रिश्तेदारों के किसी भी तरह का क्रूर व्यवहार गंभीर अपराध है। मारना-पीटना, भूखे रखना शारीरिक क्रूरता है। गाली-गलौज करना, ताने देना, अपमान करना मानसिक क्रूरता है। ऐसे में पीड़ित महिला या उसके रिश्तेदार तुरंत थाने में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। क्रूरता के अपराध में कैद और जुर्माना दोनों हो सकता है।

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