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सभी संप्रदायों में एकता से ही भारत में रामराज संभव होगा: अनुराधा सरस्वती
राष्ट्रीय उच्च पथ से सटे दांतू गांव के महायज्ञ स्थल में श्री श्री 108 मारुतिनंदन महायज्ञ के अंतिम दिन देर रात को प्रवचन में मानस मंजरी अनुराधा सरस्वती ने मानस की कथा में राम राज्याभिषेक की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान राम जब रावण का संहार कर विजयी होते हैं, तब तीनों लोकों में उनकी जय-जयकार होती है। पहले भी अयोध्याकांड में प्रभु राम के राज्याभिषेक की कथा आई है, परंतु उस समय मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का राजतिलक नहीं होता है, क्योंकि उस समय दो भाई भरत और शत्रुघ्न ननिहाल में तथा दो भाई राम व लक्ष्मण अयोध्या में थे। जब उत्तरकांड में चारों भाई मिले हैं, तो अयोध्या में रामराज की स्थापना हुई। अतः मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने दुनिया के लोगों को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जबतक भारत देश के सभी संप्रदायों में एकता की भावना जागृत नहीं होगी, तब तक यहां रामराज की स्थापना संभव नही है। यज्ञाचार्य अंजनी शरण शास्त्री ने मानस की लंका व उत्तरकाण्ड प्रसंग के बारे में कहा कि आज हमारे चारों तरफ बिगड़े हुए वातावरण में राम जैसे राजा की नितांत आवश्यकता है। बीस सूत्री के बोकारो जिला उपाध्यक्ष एवं यज्ञ समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण कुमार नायक ने स्वागत भाषण दिया। संचालन विमल प्रसाद नायक व कुणाल किशोर ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर श्यामानंद नायक, सुमित्रा देवी, अजय नायक, रूपलाल नायक, सुभाष चंद्र पाल, शिवशंकर नायक, कृति चंद्र नायक, कुणाल किशोर, मोहन कुमार नायक, जयलाल नायक, महेश्वर नायक, नागेश्वर नायक, धनेश्वर नायक, महेंद्र सिंह आदि थे।
श्रीश्री 108 मारुतिनंदन महायज्ञ का समापन, अंतिम दिन भारी संख्या में जुटे श्रद्धालु
अनुराधा सरस्वती के साथ संबोधित करते लक्ष्मण कुमार नायक।