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64 लाख की लागत से दो साल पहले बना पोस्टमार्टम व मर्चरी हाउस नहीं हुआ चालू, जाने के लिए रास्ता भी नहीं है, भवन हो गया बेकार

3 वर्ष पहले
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अशोक विश्वकर्मा बोकारो

सरकारी उदासीनता और विभागीय लापरवाही के कारण एक तो सदर अस्पताल में बनने वाले पोस्टमार्टम हाउस और मर्चरी हाउस को अनुमंडलीय अस्पताल चास में बना दिया गया। दो वर्ष पहले 64 लाख रुपए की लागत से इसका भवन बनकर तैयार हुआ। लेकिन आज तक इसे चालू नहीं किया गया। भवन यूं ही बेकार पड़ा है और डॉक्टरों को पुराने हाउस में ही शवों का पोस्टमार्टम करना पड़ रहा है। वहीं, मर्चरी हाउस के गेट में ताला लगा हुआ है। इन दोनों नए भवनों को ऐसे स्थान पर बनाया गया है, जहां आने-जाने के लिए कोई रास्ता ही नहीं बचा है।

मर्चरी हाउस के आगे की चहारदीवारी।

एक तरफ पार्क, दूसरी तरफ अनुमंडलीय अस्पताल

की चहारदीवारी

मोर्चरी हाउस के नए भवन को बनाने में लगभग 37 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इसमें तीन बड़े हॉल के अलावा दो छोटे कमरे भी बनाए गए हैं। इस भवन को बनाने के बाद चारों तरफ से पहले ही चहारदीवारी कर दी गई थी। बाद में इसके एक तरफ पार्क की और दूसरी तरफ अनुमंडलीय अस्पताल चास की चहारदीवारी बना दी गई। यहां पोस्टमार्टम के लिए अब अनुमंडलीय अस्पताल की पुरानी चहारदीवारी को तोड़ने के अलावा दूसरा कोई विकल्प ही नहीं बचा है। ऐसे में जनता के पैसे से बना यह भवन पूरी तरह से बेकार पड़ा हुआ है।

पुरानी एजेंसी ने अधूरा छोड़ दिया काम

इन दोनों ही भवनों को बनाने वाली एजेंसी ने बगैर फिनिशिंग के ही कार्य छोड़ दिया। उसके बाद बचे काम को पूरा करने की जिम्मेवारी भवन प्रमंडल विभाग को दे दी गई। लेकिन भवन प्रमंडल विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता दो माह पहले ही सेवानिवृत्त हो गए। इसकी वजह से भवन वैसे ही पड़ा हुआ है।

बिजली मिली, जल्द शुरू कराएंगे काम

इन भवनों को शुरू करने के लिए तीन फेज की लाइन की जरूरत थी, जो अब मिली है। जल्द ही तीन फेज का कनेक्शन लेकर दोनों भवन को चालू कराएंगे। 

डॉ. सोवान मुर्मू, सिविल सर्जन, बोकारो

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