भारतीय मजदूर संघ सिर्फ श्रमिक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का अंग है। यही वजह है यह आज देश के प्रथम पायदान का संगठन है। इसके पीछे असंख्य कार्यकर्ताओं का बलिदान छिपा हुआ है। यह बातें संगठन मंत्री सुरेश प्रसाद सिन्हा ने दो दिवसीय अधिवेशन के समापन पर कही। बताया कि कार्यकर्ताओं ने अपने निजी जीवन की सुख-सुविधाओं को त्यागकर श्रमिक एवं राष्ट्र हित में बलिदान दिया है। प्रदेश अध्यक्ष जयनारायण शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण ट्रेड यूनियन बनाना और चलाना कठिन हो गया है। सरकार श्रम कानूनों में अनावश्यक संशोधन कर रही है। इसका लाभ कारपोरेट घरानों को होगा और मजदूरों का शोषण बढ़ेगा।
अधिवेशन के तृतीय सत्र में कई प्रस्ताव लाए गए। कोयला, स्टील, आंगनबाड़ी, राज्य व केंद्र सरकार के कर्मी, बैंक कर्मी, बीड़ी मजदूर, सीमेंट उद्योग, लघु उद्योग आदि की समस्याओं को शामिल किया गया। संघ की प्रदेश इकाई इनके समाधान के लिए राज्य सरकार को भेजेगी। संघ के प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू ने कार्यकर्ताओं का संगठनात्मक मार्गदर्शन किया। दूसरे सत्र में महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा हुई।
मंचासीन संघ के अधिकारी।
सम्मेलन में हिस्सा लेने आए प्रतिनिधि।
प्रदेश कार्यकारिणी का गठन, रामानंद अध्यक्ष, बिंदेश्वरी महामंत्री
अधिवेशन के अंतिम दिन नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें रामानंद त्रिपाठी को अध्यक्ष, मकरू महतो, उदय कुमार, हरेश्वर सिंह, बिलासी अविनाश सोरेन व एसएन सिंह को उपाध्यक्ष, बिंदेश्वरी प्रसाद को महामंत्री, रामचंद्र गोप, सुनील कुमार, रंजय कुमार, केएन सिंह व धानी बेसरा को मंत्री, हरिलाल साव को कोषाध्यक्ष, अनूप दराद को सह कोषाध्यक्ष तथा पारसनाथ ओझा को संगठन मंत्री बनाया गया। उपाध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह, सह संगठन मंत्री गणेश मिश्र, विहिप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगन्नाथ शाही ने नई कार्यकारिणी को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में संघ के महामंत्री कृष्णा राय और टीम का योगदान रहा।